KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

महतारी के मया ल,आखर म कैसे कहौ(mahtari ke maya la aakhar ma kaise kahou)

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महतारी के मया ल,आखर म कैसे कहौ?
दाई तोर मया बने राहे ,पइंया तोर परौ।
लाने हस मोला दुनिया म
मोर अंग अंग म तोर अधिकार हे।
भगवान बरोबर तय होथस ,
तोर पूजा बिना चारोंधाम बेकार हे।
तोर आशीष मोर मुड़ म तो,जग ला नई डरौ।
दाई तोर मया बने राहे ,पइंया तोर परौ।
भुख लागे ल दाई मोर,
अपन हाथ ले कौंरा खवाथें।
हिचकी आ जाय ले,
लकर-धकर  पानी  पियाथें।
अतक मया हे कि मुहु ले न बोले सकौ ।
दाई तोर मया बने राहे ,पइंया तोर परौ।
बाबूजी मोर आजादी के,
सब्बो दिन खिलाफत रइथें।
महतारी बूता ले छुट्टी दे के
झटकुन घर आ जाबे कहिथें।
मोर मन के सबो बात,दाई ल कहे सकौ।
दाई तोर मया बने राहे ,पइंया तोर परौ।
बोली भाखा सिखाय हे,
दय हे जिनगी के ग्यान।
सुत उठके आशीष दय,
मोर बेटा बने जग म महान।
करज उतारे बिना तोर, हरू नई होय सकौ।
दाई तोर मया बने राहे ,पइंया तोर परौ।

छत्तीसगढ़, मनीभाई ‘नवरत्न’, 

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