KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

महादेवी वर्मा (chhayavaad yug ki devi)

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हिंदी मंदिर की सरस्वती,
तुम हिंदी साहित्य की जान।
छायावादी युग की देवी,
महादेवी महिमा बड़ी महान।।
दिया धार शब्दों को,
हिंदी साहित्य है बतलाता।
दिव्य दृष्टि दी भारत को,
साहित्य तुम्हारा जगमगाता।।
प्रेरणास्रोत कलम की तुम,
हो दर्पण झिलमिलाता।
दशा दिशा इस भारत की,
जो सबकुछ है दिखलाता।।
करुणामयी करुणा की देवी,
नारियों की तुम माता।
निवलों,विकलों,दुखियों की,
तुम हो आधार दाता।।
जीव जंतु प्रेमिका तुम,
हो आधुनिक मीरा रूप।
करने कायापलट जहां का,
छांव देखी न देखी धूप।।
अनुपम,अलौकिक,शब्दावली,
तुम हिंदी की शान।
युगों युगों तक हिंदी साहित्य,
करता रहेगा अभिमान।।
महादेवी वर्मा नाम,
हर कलमकार दुहराता।
प्राण वायु वह छायावादी,
लगती हिंदी विधाता।।
बंगला और संस्कृत शब्दों को,
पहनाया हिंदी जामा।
संगीत विधा मे पारंगत,
चित्रकारी का असीम खजाना।।
प्रतिमूर्ती दुख दर्द की,
ज्ञाता दे संगीत सुर झंझनाना।
छू के मन के तारों को,
छेड़ा जिसने दर्द का तरना।।
इंदुरानी, उत्तर प्रदेश