KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

माटी तोर मितान

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़़़़़माटी तोर मितान ़़़़़
तै हावस निचट आढ़ा,
नई हे थोरको गियान !
जांगर टोर मेहनत करे,
माटी तोर मितान !!
टेंड़गा पागा टेंड़गा चोंगी,
टेंड़गा पहिरे तैहा पागी !
धरे नांगर धरे कुदारी,
चकमक पखरा छेना म आगी !!
बहरा कोती तै बोवत हवस धान….
ऊँच-नीच भेदभाव नई जाने,
सबो ल तै अपन माने !
गंगा बरोबर निरमल मन,
छल कपट थोरको ऩई जाने !!
कभू नई बने तैह सियान …..
             दास (दूज)
      साह.शि़ .( एल़. बी़)
     भरदाकला (खैरागढ़)