KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

“मार्ग दुष्कर है,असम्भव नहीं”यह बता रही हैं कवयित्री विजिया गुप्ता “समिधा’ अपने कविता “साम्प्रदायिकता” में (sapradayikta)

*साम्प्रदायिकता*

आज की ज्वलन्त समस्या,
साम्प्रदायिक दंगे।
धर्म के नाम पर,
हो रही मार-काट,
और जिहाद।
जिसे धर्मयुद्ध का नाम,
दे रहे हैं लोग।
काश! ये समझ पाते की,
रामायण,गीता,कुरान
बाइबिलऔर गुरुग्रंथ।
और भी अनगिनत
धर्मग्रंथ।
एक ही कागज़ पर
छपे,सारे के सारे
लगभग एक जैसी
शिक्षा देते,
सन्मार्ग पर चलना सिखाते।
और हम,धर्म के ठेकेदार,
भूलकर उन शिक्षाओं को।
आपस में ही लड़ते,खपते
संस्कारों की धज्जियां उड़ाना,
अपनी शान समझते हैं।
मुझे लगता है।
चाहे हम किसी भी धर्म के हों।
अगर हम सब,
सिर्फ अपने-अपने 
पूज्य ग्रंथ का।
पूरी सूक्ष्मता से,गहराई से
अध्ययन करें। 
उसमें दिए उपदेशों को,
आत्मसात करें।
किसी भी अन्य धर्मग्रंथ की 
आलोचना किये बिना।
तो *साम्प्रदायिकता*
जड़ से ख़त्म हो सकती है।
विश्व शांति सदभाव का,
सपना साकार हो सकता है
किन्तु शुरुआत,
अपने घर से करनी होगी।
बिना किसी तर्क के
मार्ग दुष्कर है,
असम्भव नहीं।
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विजिया गुप्ता “समिधा’
दुर्ग-छत्तीसगढ़