KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

शिव की महिमा

कविता बहार-कविता लेखन प्रतियोगिता
कविता लेखन प्रतियोगिता-2021
प्रतियोगिता अवसर-फाल्गुन कृष्ण 13 महाशिवरात्रि
प्रतियोगिता विशेषांक-शिवजी की महिमा

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शिव की महिमा


‘‘मैं तेरी भांग घोंघट-घोंघट हारी’’
ओ मेरे भोले, तू तो करे नंन्दी की सवारी।
मेरे भोले भण्डारी, तू तो है एक विषधारी।।
‘‘मैं तेरी भांग घोंघट-घोंघट हारी’’
ओ मेरे भोले, तेरी महिमा है जग में सबसे न्यारी।
मेरे भोले भण्डारी, तुझे तो हैं भांग सबसे प्यारी।।
‘‘मैं तेरी भांग घोंघट-घोंघट हारी’’
ओ मेरे भोले, तू तो पी जाये विष का प्याला।
तेरा जग से है नाता सबसे निराला।।
‘‘मैं तेरी भांग घोंघट-घोंघट हारी’’
ओ मेरे भोले, तेरी भांग घोंघट-घोंघट हाथ में ठेक पड़ गयी।
अब तो तेरी भांग मुझे भी चढ़ गयी।।
‘‘मैं तेरी भांग घोंघट-घोंघट हारी’’
ओ मेरे भोले, संसार का हर प्राणीे तेरे आगे हो जाये नतमस्तक।
तेरे द्वार से खाली हाथ न गया कोई आज तक।।
‘‘मैं तेरी भांग घोंघट-घोंघट हारी’’

ओ मेेरे भोले, कैलाश पर बैठे तुम लगते हो निराले।
इस धरा पर तुम ही हो सबके रखवाले।।
‘‘मैं तेरी भांग घोंघट-घोंघट हारी’’
ओ मेरे भोले, तेरी भंाग घोंघट-घांेघट हाथों में पड गये छाले।
मेरे भोले भण्डारी तुम तो हो गये हो विष के प्याले।।
‘‘मैं तेरी भांग घोंघट-घोंघट हारी’’
ओ मेरे भोले, तुम ही हो मेरे अन्तर्यामी।
तुम ही हो समस्त जगत के स्वामी।।
‘‘मैं तेरी भांग घोंघट-घोंघट हारी’’
ओ मेरे भोले, तुम ही हो जग के पालनहार।
भोले बस तेरा ही मैं ध्यान करू बारम्बार।।
‘‘मैं तेरी भांग घोंघट-घोंघट हारी’’
ओ मेरे भोले, तेरी बारात के हैं अजब ठाट निराले।
जिसमें हर कोई बोले बम बम बोले।।
‘‘मैं तेरी भांग घोंघट-घोंघट हारी’’
ओ मेरे भोले, तेरी शरण में लोटा भरकर दूध जो चढावे।
भोले वो तो तेरी सासों में ही ठहर जावे।।
‘‘मैं तेरी भांग घोंघट-घोंघट हारी’’
ओ मेरे भोले, इक कन्या कुँवारी जो तेरे सौलह सोमवार व्रत रख लियेे।
उसको तो तेरी असीम कृपा से अच्छा वर मिल जाये।।
‘‘मैं तेरी भांग घोंघट-घोंघट हारी’’
ओ मेरे भोले, तुम तो है पशु-पक्षियों के नाथ।
तुम जन-जन के हृदय मे बसे हो मेरे कैलाशनाथ।।
‘‘मैं तेरी भांग घोंघट-घोंघट हारी’’


श्रीमती मोनिका वर्मा
जिला-आगरा, उत्तर प्रदेश

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