गुरू का गुणगान
हिंदी कवितागुरू पूर्णिमा पर कविता
पर्यावरण संरक्षण के लिए एक बार फिर से पहले की तरह अपनी वसुंधरा पर हरियाली और प्राण वायु के लिए प्रदूषण रोकना होगा ।
आओ मिलकर कसम खाते है कि वृक्षारोपण जरूर करना है।
धरती स्वर्ग दिखाई दे Read More »
प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन पर गद्य लेख
प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन – शशांक गर्ग Read More »
आक्सीजन के लिए जंग कोरोना महामारी के चलते देश में अधिकतर मौतें आक्सीजन ना मिलने के कारण हुई हैं।लेकिन मनुष्य जिस गति से अपने निजी स्वार्थ के लिए निरंतर वृक्षो का दोहन कर रहा है ऐसा ना हो कि आने वाले वर्षों में हर व्यक्ति को आक्सीजन के लिए जंग लड़नी पड़े। वन नीति के
आक्सीजन के लिए जंग- शिवेन्द्र यादव Read More »
बस एक पेड़ ही तो काटा है बस एक पेड़ ही तो उखाड़ा है साहब!अगर ऐसा न हो तो बस्तियां कैसे बसेगी?प्रगति,तरक्की,ख़ुशयाली कैसे आएगी? हमें आगे चलना है,पीछे नहीं रहना है,दुनिया के साथ चलकर आगे बढ़ना है।आगे बढ़ने की रफ्तार सही नहीं जाती,तुमसे इंसान की तरक्की देखी नहीं जाती।ये कैसी तरक्की है साहब? तुमने कभी
बस एक पेड़ ही तो काटा है -नदीम सिद्दीकी Read More »
झुमका : प्यार के प्यार की निशानी आज मैंने अपने तोहफे का बॉक्स निकाला,जिसे बड़े सलीके से मैंने संभाल के रखा था,आदत कहूं या तोहफे के प्रति मेरा लगावमैंने अपना हर एक तोहफा संभाल के रखा है बड़े प्यार सेऔर जब ये तोहफा आपके प्यार का दिया होतो उसके प्रति प्यार और बढ़ जाता है,
झुमका : प्यार के प्यार की निशानी Read More »
महर्षि वेद व्यासजी का जन्म आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को ही हुआ था, इसलिए भारत के सब लोग इस पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। जैसे ज्ञान सागर के रचयिता व्यास जी जैसे विद्वान् और ज्ञानी कहाँ मिलते हैं। व्यास जी ने उस युग में इन पवित्र वेदों की रचना की जब शिक्षा
गुरु पूर्णिमा पर दोहे Read More »
प्रकृति संरक्षण मंत्र-अमिता गुप्ता प्रकृति हमारा पोषण करती,देकर सुंदर सानिध्य,जीवन पथ सुगम बनाती है,जीव-जंतु जगत की रक्षा को,निज सर्वस्व लुटाती है। आधुनिकीकरण के दौर में,अंधाधुंध कटाई कर,जंगलों का दोहन क्षरण किया,खग, विहंग, पशु कीटों का,घर-आंगन आश्रय छीन लिया। प्रदूषण स्तर हुआ अनियंत्रित,प्लास्टिक,पॉलिथिन का उपयोग बढ़ा,पोखर,तड़ाग,नद, झीलों का,मृदु नीर मानव ने अशुद्ध किया। रफ्ता-रफ्ता हरियाली क्षीण
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5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में
प्रकृति और पर्यावरण Read More »
हमें जमीं से मत उखाड़ो रो-रोकर पुकार रहा हूं हमें जमीं से मत उखाड़ो।रक्तस्राव से भीग गया हूं मैं कुल्हाड़ी अब मत मारो। आसमां के बादल से पूछो मुझको कैसे पाला है।हर मौसम में सींचा हमको मिट्टी-करकट झाड़ा है। उन मंद हवाओं से पूछो जो झूला हमें झुलाया है।पल-पल मेरा ख्याल रखा है अंकुर तभी
हमें जमीं से मत उखाड़ो-अदित्य मिश्रा Read More »