July 2021

hasdev jangal

मत करो प्रकृति से खिलवाड़-दीप्ता नीमा

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

मत करो प्रकृति से खिलवाड़ मत काटो तुम ये पहाड़,मत बनाओ धरती को बीहाड़।मत करो प्रकृति से खिलवाड़,मत करो नियति से बिगाड़।।1।। जब अपने पर ये आएगी,त्राहि-त्राहि मच जाएगी।कुछ सूझ समझ न आएगी,ऐसी विपदाएं आएंगी ।।2।। भूस्खलन और बाढ़ का कहर,भटकोगे तुम शहर-शहर।उठे रोम-रोम भय से सिहर,तुम जागोगे दिन-रात पहर।।3।। प्रकृति में बांटो तुम प्यार,और […]

मत करो प्रकृति से खिलवाड़-दीप्ता नीमा Read More »

पर्यावरण संकट

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन-तबरेज़ अहमद

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन शज़र के शाखो पर परिंदा डरा डरा सा लगता है।ऐसी भी क्या तरक्की हुई है मेरे मुल्क में।कई शज़र के शाखाओं को काटकर और कई शज़र को उजाड़ कर शहर का शहर बसा लगता है।इन पर्यावरण को उजाड़ कर शहर बसा लगता है।फिर भी कहा दिल लगता है।कभी प्रकृति की

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन-तबरेज़ अहमद Read More »

सर्वधर्म सार तत्व (दोहे)

हिंदी कविता

सर्वधर्म सार तत्व (दोहे) बाइबिल नीतिवचननीतिवचन से सीख लें, मोल महत्तम माप।बुद्धि स्वर्ण से उच्च है, सच पतरस की नाप।। बुद्धिबुद्धि क्षेत्र परिमाप को, दें इतना विस्तार।चाँदा घूमें नापने, जोड़ करें साकार।। यहोवाजन्म यहोवा को दिया, मरियम तारनहार।येरुशलम भूभाग पर, चरणी में अवतार।।कुरान आयतेंअरज आयतें मानिए, कहता कर्म कुरान।मानवता का पाठ है, नियत रखें ईमान।।

सर्वधर्म सार तत्व (दोहे) Read More »

भोर वंदन- नवनिर्माण करें

हिंदी कविता

भोर वंदन-नवनिर्माण करें ====लावणी छन्दगीत 16,14 पदांत 2==== सत्य सर्वदा अपनाएँ हम, न्योछावर निज प्राण करें।…राम राज्य आधार शिला ले,आओ नवनिर्माण करें।।… सत्य विकल तो हो सकता है, नहीं पराजय अंत मिले।झूठी चादर ओढ़े कलयुग, जयचंदों सह संत मिले।।कुपित मौलवी और पादरी, भ्रष्टाचारी पंत मिले।विषमय रक्त प्रवाहित होता, दंश मनुज के दंत मिले।। उदाहरण हम

भोर वंदन- नवनिर्माण करें Read More »

सड़क पर कविता

हिंदी कविता

सड़क पर कविता है करारा सा तमाचा, भारती के गाल पर।…रो रही है आज सड़कें, दुर्दशा के हाल पर।।… भ्रष्टता को देख लगता, हम हुए आज़ाद क्यूँ?आम जनता की कमाई, मुफ्त में बरबाद क्यूँ?सात दशकों से प्रजा की, एक ही फरियाद क्यूँ?नोट के बिस्तर सजाकर, सो रहे दामाद क्यूँ?चोर पहरेदार बैठे, देश के टकसाल पर…रो

सड़क पर कविता Read More »

हे शारदा तुलजा भवानी (सरस्वती-वंदना)

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

हे शारदा तुलजा भवानी (सरस्वती-वंदना) हे शारदा तुलजा भवानी, ज्ञान कारक कीजिये।…अज्ञानता के तम हरो माँ, भान दिनकर दीजिये।… है प्रार्थना नवदीप लेकर, चल पड़े जिस राह में।सम्मान पग चूमें पथिक के, हर खुशी हो बाँह में।।उत्तुंग पथ में डाल डेरा, नभ क्षितिज की चाह में।मन कामना मोती चमकते, चल चुनें हम थाह में। जो

हे शारदा तुलजा भवानी (सरस्वती-वंदना) Read More »

hasdev jangal

मत करो प्रकृति से खिलवाड़-एकता गुप्ता

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

इस कविता में प्रकृति संरक्षण की बात कही गई है।

मत करो प्रकृति से खिलवाड़-एकता गुप्ता Read More »

हिंदी साहित्य जगत में अनेक सितारे हैं

हिंदी कविता

इस रचना के माध्यम से कवि नवीन रचनाकारों को भी साहित्य जगत में सम्मानजनक स्थान दिलाने का प्रयास कर रहा है |

हिंदी साहित्य जगत में अनेक सितारे हैं Read More »

विश्व ही परिवार है- आर आर साहू

हिंदी कविता

विश्व ही परिवार है- आर आर साहू ————— परिवार ————-ऐक्य अपनापन सुलभ सहकार है,इस धरा पर स्वर्ग वह परिवार है। मातृ,भगिनी, पितृ,भ्राता,रुप में,शक्ति-शिव आवास सा घर-द्वार है। बाँटते सुख-दुःख हिलमिल निष्कपट,है प्रथम कर्तव्य फिर अधिकार है। है तितिक्षा,त्याग,का आदर्श भी,प्रेम, मर्यादा सुदृढ़ आधार है। दृष्टि जितना और जैसा देखती,उस तरह,उतना, उसे संसार है। नीर,पावक,वायु ये

विश्व ही परिवार है- आर आर साहू Read More »

Scroll to Top