मत करो प्रकृति से खिलवाड़-दीप्ता नीमा
प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कवितामत करो प्रकृति से खिलवाड़ मत काटो तुम ये पहाड़,मत बनाओ धरती को बीहाड़।मत करो प्रकृति से खिलवाड़,मत करो नियति से बिगाड़।।1।। जब अपने पर ये आएगी,त्राहि-त्राहि मच जाएगी।कुछ सूझ समझ न आएगी,ऐसी विपदाएं आएंगी ।।2।। भूस्खलन और बाढ़ का कहर,भटकोगे तुम शहर-शहर।उठे रोम-रोम भय से सिहर,तुम जागोगे दिन-रात पहर।।3।। प्रकृति में बांटो तुम प्यार,और […]
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