July 2021

विधाता छंद मय मुक्तक- फूल

हिंदी कविता

विधाता छंद मय मुक्तक- फूल रखूँ किस पृष्ठ के अंदर,अमानत प्यार की सँभले।भरी है डायरी पूरी,सहे जज्बात के हमले।गुलाबी फूल सा दिल है,तुम्हारे प्यार में पागल।सहे ना फूल भी दिल भी,हकीकत हैं, नहीं जुमले।.सुखों की खोज में मैने,लिखे हैं गीत अफसाने।रचे हैं छंद भी सुंदर,भरोसे वक्त बहकाने।मिला इक फूल जीवन में,तुम्हारे हाथ से केवल।रखूँगा डायरी […]

विधाता छंद मय मुक्तक- फूल Read More »

प्रकृति से प्रेम पर कविता

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता, ,

प्रकृति से प्रेम – रीता प्रधान प्रकृति की सुंदरता पर आधारित रचना

प्रकृति से प्रेम पर कविता Read More »

hasdev jangal

प्रकृति से खिलवाड़ का फल – महदीप जंघेल

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

प्रकृति से खिलवाड़ और अनावश्यक विनाश करने का गंभीर परिणाम हमे भुगतना पड़ेगा। जिसके जिम्मेदार हम स्वयं होंगे।
समय रहते संभल जाएं। प्रकृति बिना मांगे हमे सब कुछ देती है।उनका आदर और सम्मान करें। संरक्षण करें।

प्रकृति से खिलवाड़ का फल – महदीप जंघेल Read More »

hasdev jangal

प्रकृति से खिलवाड़/बिगड़ता संतुलन-अशोक शर्मा

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

भौतिकता की होड़ में मानव ने प्रकृति के साथ बहुत छेड़छाड़ की है। अपने विकास की मद में खोया मानव पर्यावरण संतुलन को भूल गया है। इस प्रकार के कृत्यों से ही आज कोरोना जैसी महामारी से मानव जीवन के अस्तित्व खतरे में दिख रहा है।

प्रकृति से खिलवाड़/बिगड़ता संतुलन-अशोक शर्मा Read More »

विधाता छंद में प्रार्थना

समाज और यथार्थ

विधाता छंद में प्रार्थना विधाता छंद१२२२ १२२२, १२२२ १२२२. प्रार्थना.सुनो ईश्वर यही विनती,यही अरमान परमात्मा।मनुजता भाव मुझ में हों,बनूँ मानव सुजन आत्मा।.रहूँ पथ सत्य पर चलता,सदा आतम उजाले हो।करूँ इंसान की सेवा,इरादे भी निराले हो।.गरीबों को सतत ऊँचा,उठाकर मान दे देना।यतीमों की करो रक्षा,भले अरमान दे देना।.प्रभो संसार की बाधा,भले मुझको सभी देना।रखो ऐसी कृपा

विधाता छंद में प्रार्थना Read More »

हम तुम दोनों मिल जाएँ

समाज और यथार्थ,

हम तुम दोनों मिल जाएँ मुक्तक (१६मात्रिक) हम-तुम हम तुम मिल नव साज सजाएँ,आओ अपना देश बनाएँ।अधिकारों की होड़ छोड़ दें,कर्तव्यों की होड़ लगाएँ। हम तुम मिलें समाज सुधारें,रीत प्रीत के गीत बघारें।छोड़ कुरीति कुचालें सारी,आओ नया समाज सँवारें। हम तुम मिल नवरस में गाएँ,गीत नए नव पौध लगाएँ।ढहते भले पुराने बरगद,हम तुम मिल नव

हम तुम दोनों मिल जाएँ Read More »

भारतीय वायु सेना के सम्मान में कविता

समाज और यथार्थ,

भारतीय वायु सेना के सम्मान में कविता भारतीय वायु सेना के जवानों के,सम्मान में सादर समर्पित छंद,. (३०मात्रिक (ताटंक) मुक्तक) मेरे उड़ते…… ….. बाजों काचिड़ीमार मत काँव काँव कर,काले काग रिवाजों के।वरना हत्थे चढ़ जाएगा,मेरे उड़ते बाज़ों के।बुज़दिल दहशतगर्दो सुनलो,देख थपेड़ा ऐसा भी।और धमाके क्या झेलोगे,मेरे यान मिराजों के। तू जलता पागल उन्मादी,देख भारती साजों

भारतीय वायु सेना के सम्मान में कविता Read More »

जीत मनुज की

हिंदी कविता

जीत मनुज की . (१६,१६) काल चाल कितनी भी खेले,आखिर होगी जीत मनुज कीइतिहास लिखित पन्ने पलटो,हार हुई है सदा दनुज की।। विश्व पटल पर काल चक्र ने,वक्र तेग जब भी दिखलाया।प्रति उत्तर में तब तब मानव,और निखर नव उर्जा लाया।बहुत डराये सदा यामिनी,हुई रोशनी अरुणानुज की।काल चाल कितनी भी खेले,आखिर,………………….।। त्रेता में तम बहुत

जीत मनुज की Read More »

Scroll to Top