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अनमोल मानव जीवन पर कविता
मन हो रहा हताश – बाबूलाल शर्मा
हिंदी छा जाए दुनिया में – उपमेंद्र सक्सेना
संवाद पर कविता – सुकमोती चौहान रुचि
माता है अनमोल रतन – बाबूराम सिंह
इस वसुधा पर इन्सान वहीं – बाबूराम सिंह
राम को खेलावत कौशिल्या रानी / बाबूराम सिंह
दहेज प्रथा अभिशाप है – बाबूराम सिंह
हिन्दी का गुणगान – अकिल खान
सलिल हिंदी – डाॅ ओमकार साहू
हिंदी का पासा – उपेन्द्र सक्सेना
परवाह करने वाले – विनोद सिल्ला
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