तरी हरी नाना मोर नरी हरी नाना रे सुवाना

तरी हरी नाना मोर नरी हरी नाना

तरी हरी नाना मोर नरी हरी नाना रे सुवाना।
पिया ला सुना देबे मोर गाना तरी हरी नाना।

बेर उथे फेर , बेरा जुड़ाथे,
रातके मोरे नीदियां उड़ाथे,
अतक मया, मय काबर करें
जतक करें ओतक तरसाथे।
डाहर बैरी के देखत सुवाना
जान डारिस सारा जमाना।
तरी हरी नाना मोर नरी हरी नाना रे सुवाना।

भेंट होय रटीघटी, मुच ले हासें।
धीरे धीरे आपन जाल मा फासें।
कोन जानी काय ,मंतर मारे
आवत कि भर जाए सांसें।
निरमोही के जोग बता सुवाना
कैसे डालिस मया के बाना।
तरी हरी नाना मोर नरी हरी नाना रे सुवाना।

मनीभाई नवरत्न

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