KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

17 मई विश्व दूरसंचार दिवस के अवसर पर एक कविता

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दूरसंचार
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चहल-पहल है,मची उथल पुथल ।
आज कुछ और अलग कुछ कल।
सूचना प्रसारण में आज हलचल।
होती परिवर्तन देख लो प्रतिपल।
बदल रही है जिंदगी ,हो गई तेज रफ्तार ।
पल में देखो , बदल गई है सारा संसार ।।
संदेशा लें जाता कोई संवदिया।
फिर चली, दूरसंचार का पहिया।
कबूतरों  ने खत को पहुँचाया ।
वही खत लेटर बाॅक्स में आया।
तब हो गई थी ,पाण्डुलिपि का आविष्कार ।
आजादी में भूमिका में थे,  तब के अखबार ।
फिर विज्ञान ने, दी अपनी दस्तक
और तार से , झट संदेश पहुंचाया।
तार के बाद संदेश अब, बेतार हुआ
उपग्रह ने अंतरिक्ष में कदम जमाया।
मानव जीवन आबाद हुआ,सपने भी साकार।
जैसे -जैसे विकसित होने लगी  दूरसंचार ।।
संगणक ने बदल के रख दी  तस्वीर ।
तकनीकी चरम में गई,तोड़ के जंजीर ।
आज मोबाइल यंत्र है , सब  के  हाथ ।
आदमी कहीं जाये तो,जग रहता साथ ।
देश-विदेश के खबर से, जुड़ी है ई-अखबार ।
दुनिया पूरी देख सकें हम, टीवी में है संसार।
(रचयिता :- मनी भाई भौंरादादर बसना  )

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