कविता बहार

दोहे – जगदम्बा महिमा

हिंदी कविता

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं।]शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बताया गया है। दोहे “जगदम्बा महिमा” नवराते हैं चल रहे, करें मात का ध्यान।सबका बेड़ा पार हो, […]

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मेला पर दोहे -नवीन कुमार तिवारी

नारी जीवन और संवेदना

मेला पर दोहे मेला देखो घूमके,कितना रहता भीड़ । मानस रहते झूमते ,किसका कैसा नीड़ ।।1 खुले हाट बाजार में , बेच रहे सामान । साज बजे भोंपू सुने , बैठ  कहे श्रीमान ।।2 जमघट देखे  भागते ,उड़ने लगे गुबार । मीठा खारा खा रहे , मिलता खोया प्यार  ।।3 मेला ठेला घूमते , कटता

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तेरा आशिर्वाद रहे सदा माँ हमारी कलम पर-डा.नीलम

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तेरा आशिर्वाद रहे सदा माँ हमारी कलम पर लेकर बैठी कलम हाथ मेंलिखने मैया के गुणगानअद्भुत लीला तेरी मैयाकलम है मेरी नादान अपरुपा,अनुपम ,अलौकिकदिव्य स्वरुपा,दिव्यज्योत्सनाज्योतिर्मयी ,अक्षमाल्य,कमण्डलम धारिणी ब्रह्मचारिणी,तपश्चारिणीसाक्षात ब्रह्म स्वरुपातप की साक्षात मूर्तिमयीजगत् जननी,जग पालिका त्याग,वैराग्य,संयम,सदाचारदायिनीसर्व सिद्धि दात्रि,विजयम ददातिसर्वमंगलम्,सुमंगलम दायिनी निर्जला,निराहार तपकारणेशाक- पात  आहर्य कारणेअपर्णा नाम धारिणीकठोर तप के कारणे कांतिऔर तेज का संगम से

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jai durga maa

विंध्यवासिनी विनाश दुःख का करो -दुर्गा शंकर इजारदार

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विंध्यवासिनी विनाश दुःख का करो अजेय विंध्यवासिनी विनाश दुःख का करो ,त्रिशूल धारिणी सहाय प्राण शत्रु का हरो ।। सभी सुखी रहें यहाँ जवान हो कि वृद्ध हो ,सदैव काम क्रोध लोभ से विचार शुद्ध हो ।। विदेश देश हो सदा गुँजायमान भारती ,सभी जमात एक हो करें सुजान आरती ।। मरें नहीं अकाल मौत

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ज्योति पर्व नवरात पर दोहे -आर आर साहू

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ज्योति पर्व नवरात पर दोहे जगमग-जगमग जोत से,ज्योतित है दरबार।धरती से अंबर तलक,मां की जय-जयकार।। मनोकामना साथ ले,खाली झोली हाथ।माँ के दर पे टेकते,कितने याचक माथ।। धन-दौलत संतान सुख,पद-प्रभुता की चाह।माता जी से मांगकर,लौटें अपनी राह।। छप्पन भोगों का चढ़ा माँ को महाप्रसाद।इच्छाओं के बोझ को मन में राखा लाद।। घी का दीपक मैं जला,करने

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माँ दुर्गा से संबंधित हाइकु -सुधा शर्मा

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दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं।[शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बताया गया है। माँ दुर्गा से संबंधित हाइकु 1 देवी मंदिर झिलमिलाते जोतलगी कतार 2 भक्तों की

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सूनी इक डाली हूँ-नील सुनील

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सूनी इक डाली हूँ सूनी इक डाली हूँ। सोचें सब माली हूँ।।  तू खेले लाखों में। मैं पैसा जाली हूँ।।  घर बच्चे भूखे हैं। मैं खाली थाली हूँ।।  तू मन्नत रब की है। मैं बस इक गाली हूँ।।  अदना सा हूँ शायर। समझें वो हाली हूँ।।  मर जाऊं क्या आखिर। बरसों से  खाली हूँ।। ✍नील सुनील हरियाणा इस पोस्ट को like और

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तुममें राम कौन है?-राहुल लोहट

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तुममें राम कौन है? मैदान खुला है,भीड़ बहुत है,जोर-जोर के जयकारे चीर रहे है आस्मां,दहन है विद्वान कामूर्खों के हाथों,सजा बार-बार क्यूं ?सवाल मन को खंगोलता है।मेरा कसूर क्या बहन की इज्जत रक्षा बस?आज जरूरत है हर घर में,मुझ जैसे रावण की लड़े जो अपनी बहन खातिरहैवानों से।जलाओ,जी भर के जलाओ,मगर इतना बताओ इस लबालब भीड़ में तुममें कौन राम है?खुले

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अभी मैं मरा नहीं हूँ-नील सुनील

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अभी मैं मरा नहीं हूँ। हां देश की खातिर मर जाने की, मैंने कसम उठाई थी। जिस्म के मेरे, मर जाने पर. आंख सभी भर आई थी। जिस्म से हूं मर गया बेशक, रूह से मरा नहीं हूँ। अभी मैं मरा नहीं हूँ। राजगुरु था सुखदेव था, फांसी पर वो साथ मेरे। जोश में बोला इंकलाब जब, थे वो दोनों हाथ मेरे। फांसी पर लटका हूं बेशक, लेकिन मैं डरा

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प्रदुषण से बचाना होगा

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प्रदुषण से बचाना होगा   महकती धरा  को प्रदुषण से बचाना होगा इस नवरात्रि में एक मुहीम चलाना होगा, महकती धरा को प्रदुषण से बचाना होगा! भिन्न- भिन्न धर्म यहाँ, भिन्न- भिन्न मज़हब है, भिन्न- भिन्न प्रदुषण से इसे बचाना होगा! सघनता आबादी है, उत्सव की वातावरण , ध्वनि  की अधिकता से इसे बचाना होगा! धार्मिकता की धून

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दुर्गा के नौ रूप(दोहे)-केतन साहू “खेतिहर”

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दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं।शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बताया गया है। दुर्गा के नौ रूप- 9 दोहे शुभारंभ नवरात्र का, जगमग है दरबार। गूंज उठी चहुँ

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भक्ति पर कविता

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

भक्ति पर कविता तोरन पुष्प सजाय केउत्सव माँ के द्वार!!! गीत सुरीले गूँजते,लटके बन्दनवार!!!! नाम अनेको दे दिए,माई जग में एक!!! नामित ब्रम्हाचारिणी,कर लेंना अभिषेक!! परम सुखी परिवार होमाँग भक्ति के भीख!!! चरण धूलि माथे लगावत्स भजन ले सीख!!! –राजेश पान्डेय वत्सकविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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