कविता बहार

जय हो तेरी बाँके बिहारी

हिंदी कविता

जय हो तेरी बाँके बिहारी माँखन तुमने बहुत चुराए, बांसुरी तुमने बहुत बजाए,गोपियों को तुम बहुत सताए,माँ को उलहन बहुत सुनाए,ऐसी लीला करके गिरधर, पावन कर दीए धरा हमारी, जाऊँ मैं तुझपे बलिहारी,जय हो तेरी बाँके बिहारी ।।        बचपन में पुतना को मारे,       कालिया नाग को भी उद्धारे       अमिट कर दीए सुदामा की मित्रता, […]

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बहुत याद आता हैं बचपन का होना

हिंदी कविता

बहुत याद आता हैं बचपन का होना वो बचपन में रोना बीछावन पे सोना,,छान देना उछल कूद कर धर का कोना,,बैठी कोने में माँ जी का आँचल भिगोना,,माँ डाटी व बोली लो खेलो खिलौना,,बहुत याद आता हैं बचपन का होना।। गोदी में सुला माँ का लोरी सुनाना,कटोरी में गुड़ दूध रोटी खिलाना,,नीम तुलसी के पते

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कुछ ऐसा काम कर दिखाये हम

हिंदी कविता

कुछ ऐसा काम कर दिखाये हम कुछ ऐसा काम कर दिखाये हम ।दुनियाँ को जन्नत सा बनाएँ हम ।। फिरकापरस्ती का जहर कम हो ।सबका मालिक एक बताएँ हम ।। कोई हिन्दू न कोई मुसलमान हो ।इंसान है इंसान ही कहलाएं हम ।। बस्तियाँ अब बहुत जला ली हमने ।झोपड़ी में एक दीपक जलाएँ हम

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अपनी भाषा हिन्दी

हिंदी कविता

अपनी भाषा हिन्दी     गहरा संबंध है,सादगी और सौंदर्य मेंस्वाभाविकता और अपनत्व में।नकल में तो आती है,बनावट की बू।बोलने में सिकुड़ती हैनाक और भौं।जो है, उससे अलग दिखने की चाह।पकड़ते अपनों से अलग होने की राह।मत सोचिये कि निरर्थक कहे जा रही,क्योंकि अब मैं अपनी बात पे आ रही। बात साफ है,हिन्दी और अंग्रेजी की,देशी और

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आओ मिलकर पेड़ लगाएं

हिंदी कविता

आओ मिलकर पेड़ लगाएं सूनी धरा को फिर खिलाएंधरती मां के आंचल को हमरंगीन फूलों से सजाएंआओ मिलकर पेड़ लगाएं।। न रहे रिश्तों में कभी दूरियांचाहे हो गम चाहे मजबूरियांमिलकर घर सब सजाएंआओ मिलकर पेड़ लगाएं।। वन की सब रखवाली करेंसूखे लकड़ियो से काम चलाएंकैसे न खुश होंगी फिजाएंआओ मिलकर पेड़ लगाएं।। अगर करोगे वन

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कलम से वार कर

हिंदी कविता

कलम से वार कर परिणाम अच्छे हो या बुरे,,उसे सहर्ष स्वीकार कर,,किसी को दोषी मत ठहरा,,अपने आप का तिरस्कार कर,,समीक्षा कर अंतःकरण का,,और फिर कलम से वार कर ।।        जहाँ तुम्हें लगे मैं गलत हूँ,,       वहाँ बेझिझक अपनी हार कर,,       अपने चिंतन शक्ति को बढ़ाकर,,        तुम ज्ञान का प्रसार कर,,        अपने अन्दर अटूट विश्वास

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सखी वो मुझसे कह कर जाते

हिंदी कविता

सखी वो मुझसे कह कर जाते नैनन मेरे नीर भर गयेहृदय किया आशंकित हैगये होगें जिस मार्ग पे चलकेउस पथ उनके पग अंकित हैजाना ही था जब प्रियतम कोथोडी देर तो रह कर जाते !!१!!*सखी वो मुझसे*…………….. भोर भयी जब देखा मुडकरप्रियतम सेज दिखे ना हमेंहृदय हुआ जो पीडित उस क्षणकहूँ वो कैसे व्यथा तुम्हेंसह

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पहचान पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

पहचान पर कविता कैद न करो बस पिंजरे मेंहमें नही चाहिए पूरा जहान ।अपने को मानते हो श्रेष्ठ तोहमें भी बनने दो नारी महान ।।जहाँ कोई मालिक न होऔर न हो यहाँ कोई गुलाम ।दोस्ती का रिश्ता हो बसदोस्ती ही हो हमारी पहचान ।।आजादी नहीं चाहिए तुमसेबस बनी रहे मेरी भी शान ।जहाँ कोई छोटा-

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माता पिता पर कविता

हिंदी कविता

माता पिता पर कविता धन्य – धन्य माता -पिता ,धन्य आपका प्यार Iतन देकर ‘माधव’ किया ,बहुत बड़ा उपकार ll ब्रह्मा , विष्णू   बाद   में , नन्दी  के  असवार I‘माधव’   पहले  मात -पितु , बन्दउँ बारम्बार ll कोरे कागज पर लिखा , तुमने भला  सुलेख I‘माधव’ जैसा आज हूँ , अपनी ही छवि देख Il

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woman-day

आह्वान गीत – नारी शक्ति को समर्पित

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

आह्वान गीत अभी और लड़ाई लड़नी है,तुमको  अपने अधिकार की |चुप होकर मत बैठो तुम,भेरी भरो हुंकार की || कितनी सदियां बीत गईं,पर तुम्हें न वो सम्मान मिला |चिंतन करना होगा तुम्हें,अपने निरादर हार की || अभी और… आज भी तुम अपवित्र हो,मंदिर(सबरीमाला) में प्रवेश वर्जित है |कितनी कुत्सित-घृणित सोच है देखो इस संसार की

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हाइकु

साँझ के हाइकु

हिंदी कविता

साँझ के हाइकु 1 साँझ महके प्रिया जूड़े में फँसापिया को ताके ।। 2 साँझ पुकारे सूर्य शर्म से लाल चाँद जो झाँके ।। 3 साँझ का सूर्य बूढ़े की सुनो कोई देर क्यों हुई ? 4 रातें डराती प्रभू भजने लगी संध्या की ज्योति ।। 5 साँझ का मन थका , बुझा, रूठा सा

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virah viyog bewafa sad women

कैसे जीना भा गया

हिंदी कविता

कैसे जीना भा गया दिल में जब तेरा खयाल आता है,बस एक ही सवाल आता है,न तुम्हें सोच पाती हूँ,और न लिख पाती हूँ,तुम्हारी यादें अब भी आती हैं,दर्द के लहरों से टकरा लौट जाती हैं,महसूस करना चाहता है तुम्हें दिल,पर पहले ही तड़प उठता है,उस दर्द की सिहरन से,जिसे दिल ने महसूस किया है,काश

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