KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

भविष्य में ये कौन है? -मनीभाई नवरत्न (bhavishya men ye koun hai?)

*भविष्य में ये कौन है?*

भविष्य में ये कौन है? 
जो मुँह फाड़के 
मुझे भय दिखा रहा। 
चीखें आती है इससे
रोंगटे खड़ी कर देने वाली। 
कल तक तो दिखती थीं 
स्वर्णिम प्रभात की किरणें, 
अब तो नीरव घनघोर
काली प्रतिमाएँ 
अपने नेत्र लाल से
लपलपा रही है जीभ। 
दिखायी पड़ रहें हैं मुझे
मास्क पहने मनुज, 
चूँकि शीतल स्वच्छ समीर 
बहती नहीं स्वच्छंद। 
टंकियों से डलवाते
मुख में दो घूँट पानी। 
यंत्रवत जीवन भाँति
हो गई वाहन सी दशा। 
खंडहर टापू में एकत्र
चीटियों सा जन सैलाब। 
चहुँ ओर बवंडर में फंसी
मुँह ताकती किसी यान का
जो ले चले मंगल की ओर। 
भुख से तड़पते, 
रोग से कराहते
बन बैठे हैं सब जान के प्यासे। 
अब पेड़ से इंतजार नहीं 
कब भोजन मिले फल का? 
टहनी पत्तियों में भी आती
गजब का मिठास। 
मैं नींद में 
अपने मौत को पाता
इससे पहले कुछ दार्शनिक
जलाते दिखे मशाल। 
लगाते दिखे पेड़, 
करते नालियों की सफ़ाई। 
उनके कर्म में नेकी 
और दिल में अच्छाई। 
आपसी दुश्मनी छोड़, 
शांतिपूर्ण सहभाव से
वचन लिया 
कदम न रखने का
अपने सीमा के बाहर। 
लोग जुड़ रहे हैं
गाँव जुड़ रहा 
इस भांति से शहर से होते हुए
हर प्रांत, हर देश जुड़ रहा। 
अब बदल रहा विश्व अपना भेष। 
सब एक हो रहे, नही देश-विदेश। 

?मनीभाई नवरत्न छत्तीसगढ़

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