मन और भावनाएँ

14 दिसंबर ऊर्जा संरक्षण दिवस पर विशेष लेख

मन और भावनाएँ, ,

विश्व ऊर्जा संरक्षण दिवस 14 दिसंबर को मनाया जाता है। दिन का उद्देश्य ऊर्जा की खपत के महत्व को उजागर करना है। यह दिवस शामिल मुद्दों पर तात्कालिकता की भावना पैदा करता है।

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कहानी कैसे लिखें

मन और भावनाएँ

कहानी, हिन्दी में गद्य लेखन की एक विधा है। उन्नीसवीं सदी में गद्य में इस नई विधा का विकास हुआ .कहानी कैसे लिखें यहाँ इस बात की जानकारी दी जा रही है

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छंद क्या है? इसके प्रमुख अंगों को जानिए

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सामान्यतः लय को बताने के लिये छन्द शब्द का प्रयोग किया गया है। यह अंग्रेजी के ‘मीटर’ अथवा उर्दू-फ़ारसी के ‘रुक़न’ (अराकान) के समकक्ष है। छंद क्या है? विशिष्ट अर्थों या गीत में वर्णों की संख्या और स्थान से सम्बंधित नियमों को छ्न्द कहते हैं जिनसे काव्य में लय और रंजकता आती है। छंद व्यवस्था

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हिन्दी निबंध : कोरोना वायरस (संकलित रचना )

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प्रस्तावना : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह कहना की कोरोना अमेरिका पर पर्ल हार्बर और 9/11 के आतंकी हमले से बड़ा हमला है. जो इस बात की पुष्टि करता है कि दुनिया का महाशक्ति कहलाने वाला देश कोरोना के सामने कैसे अपना घुटना टेकते नजर आ रही है. आज दुनिया में ऐसा कोई

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दम्भ पर कविता – बाबूलालशर्मा *विज्ञ*

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दम्भ पर कविता घाव ढाल बन रहे. स्वप्न साज बह गये।. पीत वर्ण पात हो. चूमते विरह गये।। काल के कपाल पर. बैठ गीत रच रहा. प्राण के अकाल कवि. सुकाल को पच रहा. सुन विनाश गान खगरोम की तरह गये।पीत वर्ण……….।। फूल शूल से लगेमीत भयभीत छंदरुक गये विकास नव. छा रहा प्राण द्वंद.

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manibhai Navratna

सबसे बड़ा प्रैंकर: मनीभाई नवरत्न

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सबसे बड़ा प्रैंकर : मनीभाई नवरत्न ये जो छूटती हैहंसी की झरने लबों से ।हो सकती है स्वास्थ्यवर्धक ,पर नहीं कह सकतेये फूटी होगी प्राकृतिक । पर इसमें दोष नहीं है ,अवतरण जो हुआ तेराऐसे भयानक कृत्रिम जग में। कभी-कभी सोचता हूँझूठा नहीं था प्लेटो।जो कहता था ये दुनिया मिथ्या है,उससे भी बनावटी यहाँ के

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वर्दी के सम्मान पर कविता

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वर्दी के सम्मान पर कविता १बलिदानी पोशाक है, सैन्य पुलिस परिधान।खाकी वर्दी मातृ भू, नमन शहादत मान।।२खाकी वर्दी गर्व से, रखना स्व अभिमान।रक्षण गुरुतर भार है, तुमसे देश महान।।३सत्ता शासन स्थिर नहीं, स्थिर सैनिक शान।देश विकासी स्तंभ है, सेना पुलिस समान।।४देश धरा अरु धर्म हित, मरते वीर सपूत।मातृभूमि मर्याद पर , आजादी के दूत।।५आदि काल

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सूरज पर कविता- आर आर साहू

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सूरज पर कविता लो हुआ अवतरित सूरज फिर क्षितिज मुस्का रहा।गीत जीवन का हृदय से विश्व मानो गा रहा।। खोल ली हैं खिड़कियाँ,मन की जिन्होंने जागकर, नव-किरण-उपहार उनके पास स्वर्णिम आ रहा। खिल रहे हैं फूल शुभ,सद्भावना के बाग में,और जिसने द्वेष पाला वो चमन मुरझा रहा। चल मुसाफिर तू समय के साथ आलस छोड़ दे,देख

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मुझे अभी नहीं सोना है

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मुझे अभी नहीं सोना है मुझे अभी नहीं सोना है। जब तक थक कर चूर न हो जाऊँ, भावनाओं का बोझ ढोना है। मुझे अभी नहीं सोना है। ख्वाब जब तक न हों पूरे, मैंने ही बंदिशें लगायीं खुद पेख्वाब देखने पर।। घटाटोप अँधेरा परये झींगुर के शोरकहते हैं कुछ तो । शायद बुझाने को कहतेआँखों के दीये। पर इन कूप्पियों में

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भावना तू कौन है ?

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भावना तू कौन है ? क्रोध लोभ हास मेरात में प्रकाश मेंराग और द्वेष मेंप्रीत नेह क्लेश मेंदेखता हूँ मौन हैभावना तू कौन है? भय अभय चित्त मेंहार में व जीत मेंभूख और प्यास मेंदूर हो या पास मेंदेखता हूँ मौन हैभावना तू कौन है ? अश्रु जब पड़े ढुलककांपने लगे अधरतू बड़ी उदास सीमन

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आज मैं बोलूंगा

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आज मैं बोलूंगा आज मैं बोलूंगा…खुलकर रखूंगा अपने विचार…अभिव्यक्ति की आजादी जो हैं…सीधे सपााट, सटीक शब्द रखूंगा…आम जनता के मन मस्तिष्क में ..समाने वाले..मस्तिष्क की गहराईयोंं तक…उतर जायेंगे…मौन शब्द…करेंगे …प्रहार पर प्रहार… छलनी करेेंगे…अन्तर्आत्मा…नहीं कहूूंंगा अनर्गल…कहना भी नहीं चाहिए क्योंकि…अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब…किसी पर कुछ भी… जबरन लादना तो नहीं है…नहीं भूलूंगा अपनी सीमाएं….करूंगा

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