बहुत भटक लिया हूँ मैं – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
हिंदी कविताइस रचना के माध्यम से मैं जीवन को एक दिशा देना चाहता हूँ | एक कोशिश जो शायद आपको पसंद आये |
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इस रचना के माध्यम से मैं जीवन को एक दिशा देना चाहता हूँ | एक कोशिश जो शायद आपको पसंद आये |
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इस रचना के माध्यम से कलम अपने दर्द को किस तरह बयाँ कर रही है को बेहतर तरीके से पंक्तिबद्ध करने की एक कोशिश की गयी है |
मेरी कलम से पूछो – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम” Read More »
तीर्थ भूमि पर जन्म धरे से संत नहीं कहलाओगे
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ज्योति यह जले सूत्र संगठन सँभाल, ज्योति यह जले।कोटि-कोटि दीप-माल ज्योति यह जले। राष्ट्र अंधकार के विनाश के लिए,चिर अतीत के धवल प्रकाश के लिए।बुद्धि के, विवेक के विकास के लिएवृद्धि के समृद्धि के प्रयास के लिए।त्याग की लिए मशाल, ज्योति यह जले। सूत्र संगठन… राष्ट्र की अखण्ड साधना अमर बने,प्राण-प्राण-कंठ की पुकार एक हो।राष्ट्र
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जन्म चाहिए प्यारे हिन्दुस्तान में एक हमारी छोटी विनती, भगवन ! रखना ध्यान में,हमें हमेशा पैदा करना, प्यारे हिन्दुस्तान में ॥ सिर पर है हिम मुकुट सलोना, कंठहार गंगा-यमुना,हरियाली की चादर मनहर, फूल – फलों का है गहना।चन्दन भरी हवा लहराती, प्यारे हिन्दुस्तान में ॥ एक हमारी राम-कृष्ण की जन्मभूमि यह, वीर भगत की यह
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रिश्ते नाते (कुण्डलिया )- माधुरी डडसेना नाते गढ़ने के लिए , रचने पड़ते स्वांग ।बार बार हैं जाँचते , कहता क्या पंचांग ।।कहता क्या पंचाग , बनी उत्सुकता भारी ।करते तिकड़म सर्व , कठिन करते तैयारी ।।मुदिता भर मुस्कान , शून्य फल लेकर आते ।कभी कहीं बन मीत , निभाते अपने नाते ।। नाते देखे
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शादी के वातावरण को बयां करती कविता
शादी पर कविता- सुकमोती चौहान Read More »
श्री विष्णु भगवान की प्रार्थना
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बहार शब्द पर दोहा रंग बिरंगे फूल से , छाए बाग बहार ।भौरें भी मदमस्त हो , झूमे मगन अपार ।। रखें भरोसा ईश पर , जीवन हो उजियार ।सदा प्रतिष्ठा मान से , छाए हर्ष बहार ।। घर में खुशी बहार है , अपने भी हैं साथ । करे दिखावा प्रेम का , पकड़ रखे
माँ कामाख्या की कथा =================माँ कामाख्या की कथा, बता रहा है दीन। जिसकी सम्पति लुट चुकी, तन-मन भी है क्षीन।। यही दीन ऋण बोझ से , था संतप्त मलीन। सूदखोर प्रति दिन कहे , सूद पटा दे दीन।। था गरीब पर आन थी, उसकी भी कुछ शेष। माँ कामाख्या की करे, पूजा नित्य विशेष।। साहूकार
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मनीभाई के पिरामिड रचना ★कलम,कागज,कलमकार★मैंएकअबूझतुकबंदीकलमकारहोता ज्यों व्यथितदेता उसे आकारहै मेरे सहचरकलम कागजमुखर नहींमुझ जैसानिशब्ददोनोंही। मनीभाई”नवरत्न” मनीभाई के पिरामिड रचना ★मरणासन्न★ येमेरीकौन सीहै अवस्थाजहाँ से अबदिखता है सचहोने लगा पवित्रकैसी भुलभुलैयाअब चला पतामरणासन्नहकीकतजिन्दगीदिखादी। “मनीभाई”नवरत्न” मनीभाई के पिरामिड रचना ★रिश्ते नातों का जाल★ ये जगअजीबजहाँ परहोती सबकीअलग जिन्दगीतथापि समाहितरिश्ते नातों का जालखट्टी मीठी यादेंआगे बढ़ातीकहानी कोहरेकसिरेमें।“मनीभाई” नवरत्न,मनीभाई
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