प्रकृति और पर्यावरण

प्रकृति की सुंदरता, ऋतुओं के परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और सृष्टि के विविध रूपों को दर्शाने वाली कविताएँ इस वर्ग में संकलित हैं।

जीवन यही है

प्रकृति और पर्यावरण

जीवन यही है मार्च के महीने मेंदेखता हूँ बिखरे पत्ते धरती की छाती पररगड़ते घिसतेहवा की सरसराहट के संगखर्र खर्र की आवाज बिखरती हैं कानों मेंयत्र तत्रटहनियों से अलग होने के बादमृत प्रायः, काली पीली काया बिखरे पत्तों की…छोड़ती है अपनी अमिट छापउम्रदराज हो जाते हैंआदमी की तरह..सूखे पत्तेहरितिमा नहीं रहती जब कायमवसंत ऋतु के […]

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ऋतुराज बसंत

प्रकृति और पर्यावरण

ऋतुराज बसंत ऋतुराज बसंत प्यारी-सी आई,पीले पीले फूलों की बहार छाई।प्रकृति में मनोरम सुंदरता आई,हर जीव जगत के मन को भाई। वसुंधरा ने ओढ़ी पीली चुनरिया,मदन उत्सव की मंगल बधाइयाँ ।आँगन रंगोली घर द्वार सजाया,शहनाई ढ़ोल संग मृदंग बजाया । बसंत पंचमी का उत्सव मनाया,माँ शारदे को पुष्पहार पहनाया।पुष्प दीप से पूजा थाल सजाया,माँ की

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ऋतुराज का आगमन

प्रकृति और पर्यावरण

ऋतुराज का आगमन ऋतुराज बसंत लेकर आयेवसंत पंचमी, शिवरात्रि और होलीआ रही पेड़ों के झुरमुट सेकोयल की वो मीठी  बोली । बौरों से लद रहे आम वृक्षहै बिखर रही महुआ की गंधनव कोपल से सज रहे वृक्षचल रही वसंती पवन मंद । पलाश व सेमल के लाल-लाल फूलभँवरे मतवाले का मधुर गानसौन्दर्य बिखेरती मौसम सुहावनाऔर

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संगीत जरुरी है  

प्रकृति और पर्यावरण

संगीत जरुरी है   जीवन  एक  मधुर   संगीत  है  ।इसे  सुर  लय  में  गाना  सीखो ।सात  सुरो  की स्वर मालिका  को,शुद्ध   कंठों  से  लगाना  सीखो ।। परमेश्वर   का    वरदान  है ,  संगीत  ।सुर  -लय  छंद   का  गान  है,  संगीत ।संगीत   नहीं  तो ,  जीवन   नीरस  है ।गुणी  जन  की  पहचान   है,  संगीत ।। सप्त  सुरों  की 

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निराला प्रकृति- कुंडलिया छंद

प्रकृति और पर्यावरण

निराला प्रकृति निराला रूप प्रकृति का , लगता है चितचोर।भाये मन को ये सदा , करता भाव विभोर।।करता भाव विभोर , सभी को खूब लुभाता।फैला चारों ओर , मनुज दोहन करवाता ।।रखना ‘मधु’ यह ध्यान , बनें हम नहीं निवाला।प्रकृति का रहे साथ , करें कुछ काम निराला।। मधुसिंघी नागपुर (महाराष्ट्र)

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