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बस्तर धाम पर कविता-शशिकला कठोलिया
आसाम प्रदेश पर आधारित दोहे-सुचिता अग्रवाल “सुचिसंदीप”
बेटी हूँ आपकी-भागवत प्रसाद साहू
धुआँ घिरा विकराल
विनाश की ओर कदम
प्रकृति मातृ नमन तुम्हें
पेड़ धरा का हरा सोना है
पर्यावरण दूषित हुआ जाग रे मनुज जाग/सुधा शर्मा
जल से जीवन जगत चराचर
भगवान परशुराम पर कविता
पालन अपना कर्म करो
बसन्त और पलाश
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