विज्ञान, तकनीक और भविष्य

विज्ञान, तकनीकी विकास, डिजिटल युग और भविष्य की कल्पनाओं पर आधारित आधुनिक विषयों की कविताएँ इस श्रेणी में संकलित की जाती हैं।

मैं हूं एक लेखनी-शशिकला कठोलिया

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

मैं हूं एक लेखनी मैं हूं एक लेखनी ,क्यों मुझे नहीं जानता ,निरादर किया जिसने ,जग में नहीं महानता।जिसने मुझे अपनाया ,हुआ वह बड़ा विद्वान ,जिसने किया आदर ,मिला यश और सम्मान ,मेरे ही द्वारा हुआ ,रचना महाभारत रामायण ,साहित्यो का हुआ विमोचन ,ज्ञान विज्ञान का लेखन ,देश में हुए वृहद कार्य, मेरे ही भरोसे बल […]

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प्रश्न है अब आन का-प्रवीण त्रिपाठी

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

प्रश्न है अब आन का हर  प्रगति  के  मूल में  स्थान  है  विज्ञान का।खोज करता नित्य जो उपयोग करके ज्ञान का।1 रात दिन वो जूझते भारत कभी पीछे न हो।देश जे हित काम करके ध्यान रखते मान का।2 टोलियाँ वैज्ञानिकों की खोज करतीं नित नयी।राष्ट्र करता है प्रशंसा उनके नए अवदान का।3 भूलकर परिवार जो

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17 मई विश्व दूरसंचार दिवस के अवसर पर एक कविता

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

विश्व दूरसंचार दिवस १७ मई को मनाया जाता है। यह दिन 17 मई 1865 को अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ की स्थापना की स्मृति में विश्व दूरसंचार दिवस के रूप में जाना जाता था। वर्ष1973 में मैलेगा-टोर्रीमोलिनोन्स में एक सम्मेलन के दौरान इसे घोषित किया गया। इस दिन का मुख्य उद्देश्य इंटरनेट और नई प्रौद्योगिकियों द्वारा लाया गया सामाजिक परिवर्तनों की

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