विज्ञान, तकनीक और भविष्य

विज्ञान, तकनीकी विकास, डिजिटल युग और भविष्य की कल्पनाओं पर आधारित आधुनिक विषयों की कविताएँ इस श्रेणी में संकलित की जाती हैं।

प्रकृति पर कविता

विज्ञान, तकनीक और भविष्य, , ,

प्रकृति पर कविता सप्त सुरीला संगीत है , प्रकृति का हर तत्व । सजा देता यह जीवन राग, भर देता है महत्त्व। एक एक सुर का अपना ,अलग ही अंदाज है । समझना तो पड़ेगा हमें ,अब तो इसका महत्व ।। समय आने पर सब कुछ जता देती है ये हमें कहीं गुना ज्यादा राज […]

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विकास पर कविता-नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

विकास पर कविता उनकी सोच विकासवादी हैउन्हें विश्वास है केवल विकास परविकास के सारे सवालों परवे मुखर होकर देते है जवाबउनके पास मौजूद हैंविकास के सारे आँकड़े कृषि में आत्मनिर्भर हैंखाद्यान से भरे हुए हैं उनके भंडारआप भूख से मरने का सवाल नहीं करनावे आंकड़ों में जीत जाएंगेआप सबूत नहीं दे पाएंगेआपको मुँह की खानी

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जीवन है अनमोल पर कविता

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

जीवन है अनमोल पर कविता दुर्लभ मानव देह जन, सुनते कहते बोल।मानवता हित ‘विज्ञ’ हो, जीवन है अनमोल।।. ✨✨✨धरा जीव मय मात्र ग्रह, पढ़े यही भूगोल।सीख ‘विज्ञ’ विज्ञान लो, जीवन है अनमोल।।. ✨✨✨मानव में क्षमता बहुत, हिय दृग देखो खोल।व्यर्थ ‘विज्ञ’ खोएँ नहीं, जीवन है अनमोल।।. ✨✨✨मस्तक ‘विज्ञ’ विचित्र है,नर निजमोल सतोल।खोल अनोखे ज्ञान पट,

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जिंदाबाद पर कविता

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जिंदाबाद पर कविता लाईलाज घातकवायरस के आगमन परदेवालय, खुदालय व गोडालयया अन्य धर्मस्थलसब बंद हैंआरती, अजान व प्रार्थनाअनिश्चित काल के लिएटाल दीं गईं हैंअनुष्ठान निलंबित हैंटोने-टोटकेजादू-मंत्रसब निष्प्रभावी हैंखुले हैंऔषधालय, दवालय व जांचालयचिकित्सक जिंदाबादबहुउद्देशीय स्वास्थ्य-कर्मी जिंदाबादविज्ञान जिंदाबादमास्क बनाने वालेजिंदाबादमास्क बांटने वालेजिंदाबाद -विनोद सिल्ला©

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नमक पर व्यंग्य

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नमक पर व्यंग्य होटल में खाने के मेज पर छोटे छोटे छिद्रों वाले डिब्बे पड़े ही रहते हैं।कार्टून बने डिब्बे में नमक मिर्च भरे होते हैं, दाल सब्जी में नमक कम हो तो मन मर्जी डाल लो।लेकिन सब्जी में नमक ज्यादा होने पर सारा जायका बिगड़ जाता है।नमक को सब्जी का जान कह सकते हैं,पानी

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मिट्टी की घट पर कविता की महिमा बताती सुकमोती चौहान रुचि की छप्पय छंद में यह अनूठा काव्य

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मिट्टी की घट पर कविता मिट्टी घट की ओर ,चलो अब लौटे हम सब।प्लास्टिक का प्रतिबंध,मनुज स्वीकारोगे कब।मृदा प्रदूषण रोक,पीजिए घट का पानी।स्वस्थ रहेगा गात, स्वच्छता बने निशानी।घड़ा सुराही की शुद्धता, मान रहा विज्ञान भी।लाइलाज रोगों की दवा,मिट्टी यह वरदान भी। ✍ सुकमोती चौहान रुचिबिछिया,महासमुन्द,छ.ग.

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हम किधर जा रहे हैं ?

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हम किधर जा रहे हैं क़यास लगाए जा रहे हैं,कि हम ऊपर उठ रहे हैं,क़ायम रहेंगे ये सवालात,कि हम किधर जा रहे हैं? कल, गए ‘मंगल’ की ओर,फिर ‘चंदा-मामा’ की ओर,ढोंगी हो गए, विज्ञानी बन,कब लौटेंगे ‘मनुजता’ की ओर? ‘संस्कृति’, ‘संस्कार’ ठेके पर हैं,‘देश’ और ‘शिक्षा’ ठेके पर हैं,जनता, सिर्फ पेट भरकर खुश है,‘सरकार’, ‘अदालत’

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माधुरी मंजरी- हिंदी काव्य

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सेवा पर कविता सेवा वंचित मत रहो,तन मन दीजे झोकसेवा मे सुख पाइए,नहीं लगाओ रोक ।।1।। जो सेवा संपन्न है ,देव अंश तू जान ।इनके दर्शन मात्र से ,मिलते कई निदान ।।2।। सेवा का व्यापार कर ,बनते आज अमीर ।पीड़ित जन सब मूक हैंसाहब तुम बेपीर ।।3।। सेवा कुर्बानी चहैकरे अहं का नाश ।सो अपनाये

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mosquito

मच्छर -अजस्र(दुर्गेश मेघवाल)

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मच्छर -अजस्र(दुर्गेश मेघवाल)  एक हादसा कल रात हो गया,                         हो बीमार मैं पस्त पड़ा।मच्छर एक ललकारते हुए,                     तान के सीना समक्ष खड़ा।मच्छर हूँ मैं ,मुझसे तुम सब,                 

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रोशनी पर कविता -रूपेश कुमार

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रोशनी पर कविता प्यार का दीपक ज़लाओ इस अंधेरे मे ,रुप का जलवा दिखाओ इस अंधेरे मे ,दिलो का मिलना दिवाली का ये पैगाम ,दुरिया दिल का मीटाओ इस अंधेरे मे ! अजननी है भटक न ज़ाए कही मंजिल ,रास्ता उसको सुझाओ इस अंधेरे मे ,ज़िन्दगी का सफर है मुश्किल इसलिए ,कोई हमसफर हमदम बनाओ

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संयुक्त राष्ट्र पर कविता- दूजराम साहू

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

संयुक्त राष्ट्र पर कविता आसमान छूने की है तमन्ना, अंधाधुंध हो रहे अविष्कार! चूक गए तो विनाशकारीसफलता में जीवन उजियार! !  विज्ञान वरदान ही नहीं, अभिशाप भी है, कहीं नेकी करता तो कहीं पाप भी है! उन्नति में लग जाए तोकर दे भव से पार ! चूक गए तो विनाशकारीसफलता में जीवन उजियार ! !  निर्माण के इस पावन युग

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