विज्ञान, तकनीक और भविष्य

विज्ञान, तकनीकी विकास, डिजिटल युग और भविष्य की कल्पनाओं पर आधारित आधुनिक विषयों की कविताएँ इस श्रेणी में संकलित की जाती हैं।

वागेश्वरी वंदना

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

वागेश्वरी वंदना माँ वीणावादिनी , मां बुद्धिदायिनी तव महिमा है अपरंपार कर माते तू लोकाद्धार तव ममता से जग आलोकित ज्योतिर्मय जग जगमग शोभित गाता नवगीत संसार………! वागेश्वरी , माँ ज्ञानदायिनि , सबको देती बुद्धि, ज्ञान , तव दृग जग का कल्पना द्वार……! दृष्टि से सृष्टि आलोकित तेज से जगजीवन है शोभित तव कृपावश ज्ञान […]

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भाग्य मुकद्दर नसीब पर कविता

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

भाग्य/मुकद्दर/नसीब पर कविता- सोरठा छंद कर्म लिखे का खेल, भाग्य भूमि जन देश का।कौरव कुल दल मेल, करा न माधव भी सके।। लक्ष्मण सीताराम, भाग्य लेख वनवास था।छूट गये धन धाम, राजतिलक भूले सभी।। पांचाली के भाग्य, पाँच पति जगजीत थे।भोगे वन वैराग्य, कृष्ण सखी जलती रही।। कहते यही सुजान, भाग्य बदलते कर्म से।जग में

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बचपन पर कविता

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

जन्म से लेकर किशोरावस्था तक के आयु काल को कहते है। विकासात्मक मनोविज्ञान में, बचपन को शैशवावस्था (चलना सीखना), प्रारंभिक बचपन (खेलने की उम्र), मध्य बचपन (स्कूली उम्र), तथा किशोरावस्था (वयः संधि) के विकासात्मक चरणों में विभाजित किया गया है। इसी प्यारे बचपन पर ही आधारित है यह बचपन पर कविता बचपन पर कविता मेरा बचपन-

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अविनाश तिवारी की रचना

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अविनाश तिवारी की रचना मां मंदिर की आरती मां मंदिर की आरती,मस्जिद की अजान है।मां वेदों की मूल ऋचाएं, बाइबिल और कुरान है। मां है मरियम मेरी जैसी,मां में दिखे खुदाई है।मां में नूर ईश्वर कारब ही मां में समाई है।मां आंगन की तुलसी जैसीसुन्दर इक पुरवाई है।मां त्याग की मूरत जैसीमां ही पन्ना धाई

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mera bharat mahan

मेरा भारत देश महान (16-15 मापनी नवगीत)

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मेरा भारत देश महान (16-15 मापनी नवगीत) पाटी पर खड़िया से लिख दूँमेरा भारत देश महान।पढ़ लिख कर मैं कवि बन गाऊँभारत माता के गुणगान।। बाबा चिन्ता मत कर मेरीलौटेंगे बीते दिन रीतदिनकर बनकर गीत लिखूँगाछंद लिखूँगा माँ की प्रीत गाएँगे सब शाम सवेरेऐसी लिखूँ तिरंगा तान।पाटी……………….,..।। पोथी कलम दिलाना मुझकोकुछ ही दिन बस सहने

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हे शारदा तुलजा भवानी (सरस्वती-वंदना)

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हे शारदा तुलजा भवानी (सरस्वती-वंदना) हे शारदा तुलजा भवानी, ज्ञान कारक कीजिये।…अज्ञानता के तम हरो माँ, भान दिनकर दीजिये।… है प्रार्थना नवदीप लेकर, चल पड़े जिस राह में।सम्मान पग चूमें पथिक के, हर खुशी हो बाँह में।।उत्तुंग पथ में डाल डेरा, नभ क्षितिज की चाह में।मन कामना मोती चमकते, चल चुनें हम थाह में। जो

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मातृभूमि वंदना

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ताटंक छंदविधान- १६,१४ मात्रा प्रति चरणचार चरण दो दो चरण समतुकांतचरणांत मगण (२२२) मातृभूमि वंदना वंदन करलो मातृभूमि को,पदवंदन निज माता का।दैव देश का कर अभिनंदन,वंदन जीवन दाता का।सैनिक हित जय जवान कहें हम,नमन शहीद, सुमाता को।जयकिसान हम कहे साथियों,अपने अन्न प्रदाता को। विकसित देश बनाना है अब,जय विज्ञान बताओ तो।लेखक शिक्षक कविजन अपने,सबका मान

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जाग्रत हो हे भारतवासी

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

जाग्रत हो हे भारतवासी जहाँ कभी पुष्प वाटिका हुआ करती थी, वहाँ आज लाशों का अंबार लगा हुआ है , जो जमीन कभी सोने की चिड़िया होती थी ,वहाँ आज लाशों का विछावन बिछा है , जो कभी विश्व का भाग्य विधाता हुआ करता था ,वो आज भिखारी बना घुमाता है , जहाँ कभी मंदिरो

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कोरोना काल में परिचारिकाओं के लिए कविता – शिवांशी यादव

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्सेस (नर्स लोगन के अंतर्राष्ट्रीय समीति) एह दिवस के 1965 से हर साल मनावेले। जनवरी 1974, से एकरा के मनावे के दिन 12 मई के चुनल गइल जवन की फ्लोरेंस नाइटेंगल के जन्म दिवस हवे। फ्लोरेंस नाइटेंगल के आधुनिक नर्सिंग के संस्थापक मानल जाला। कोरोना काल में परिचारिकाओं के लिए मानव विज्ञान से पढी हुई।हर वक़्त सेवा

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परशुराम की प्रतीक्षा -रामधारी सिंह ‘दिनकर’

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

परशुराम की प्रतीक्षा -रामधारी सिंह ‘दिनकर’ छोड़ो मत अपनी आन, शीश कट जाए,मत झुको अनय पर, भले व्योम फट जाए। दो बार नहीं यमराज कण्ठ हरता है,मरता है जो, एक ही बार मरता है। तुम स्वयं मरण के मुख पर चरण धरो रे।जीना है तो मरने से नहीं डरो रे॥ आँधियाँ नहीं जिसमें उमंग भरती

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विश्व पुस्तक दिवस पर दोहे

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

यह विभिन्न श्रेणियों के अर्न्तगत हिंदी, अंग्रेजी तथा अन्य प्रमुख भारतीय भाषाओँ एवं ब्रेल लिपि में पुस्तकें प्रकाशित करता है। यह हर दूसरे वर्ष नई दिल्ली में ‘विश्व पुस्तक मेले’ का आयोजन करता है, जो एशिया और अफ्रीका का सबसे बड़ा पुस्तक मेला है। यह प्रतिवर्ष 14 से 20 नवम्बर तक ‘राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह’ भी मनाता है। विश्व पुस्तक दिवस पर दोहे ज्ञान,ध्यान,विज्ञान

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आओ चलें कुछ दूर – कविता

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

इस कविता के माध्यम से जिन्दगी को एक अलग मुकाम पर स्थापित करने का एक प्रयास है |
आओ चलें कुछ दूर – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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