KAVITA BAHAR
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कोरोना काल में परिचारिकाओं के लिए कविता

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कोरोना काल में परिचारिकाओं के लिए

मानव विज्ञान से पढी हुई।
हर वक़्त सेवा में खडी हुई।
पीड़ितों से जुड़ी हुई
ऐसी होती परिचारिका ।

लोगों की जान बचाएं।
परिवार को बचाएं।
खुद की जान खतरे में डालकर ।
अपने परिवार से दूर होकर।
चाहकर भी उनके पास ना जाकर
अपनों को बचाती परिचारिका।
पीड़ितों को अपना मानकर
उनका उपचार करती परिचारिका
ऐसी होती परिचारिका।

परिचारिका शब्द कर्त्तव्य से जोडता
अपना कर्तव्य निभाती परिचारिका
माँ-बाप की परी होती परिचारिका
पीड़ितों के लिए सहायिका बन जाती परिचारिका
ऐसी होती परिचारिका ।

पस और गन्दगी से लड़े-लड़े
पीड़ितों के लिए खड़े-खड़े
ऐसी होती परिचारिका ।
जिसे कहते सब सिस्टर
वही है सबकी प्रोटेक्टर
जिसे कहते सब परिचारिका
वही है सबकी उपचारिका
ऐसी होती परिचारिका ।।


नाम- शिवांशी यादव
उम्र-15

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2 Comments
  1. Anand says

    परिचारिका के प्रति सुन्दर प्रस्तुति।

  2. वंशिका यादव अनुष्का (अनू) says

    accha hai