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कोरोना काल- मधुसिंघी

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कोरोना काल- मधुसिंघी

जो भी सोचें समझें पहले , जीवन की उपयोगी शाम।।
काल मिला हमको चिंतन का , सोच समझकर करना काम।

मानव जाति पड़ी संकट में , हाहाकार करे हर ग्राम।।
कोरोना सबको सिखलाता , एक रहो मिल कर हो काम।

पहले सब हिलमिल रहते थे , आज अकेले बीते शाम।
जान पड़ी है अब सांसत में , क्या सूझे अब कोई काम।।

बदला काल यही अब देखो , रोजाना करना व्यायाम।
बदलो अब तो जीवन शैली, आवश्यक है अब ये काम।।

साफ सफाई ज्यादा रखना , सासों पर करना है ध्यान ।
ऐसी है ये अलग बिमारी , जिंदा रखना अपनी जान ।।

साँसों का सौदा होता है , देखें होती जीवन शाम।
दूर रहो पर मिलकर रहना , आना हमको सबके काम।।

जीवन जीना एक कला है , सीखें इसको लेना काम।
रह जायेगी कोरी यादें , लेंगे सब अपना फिर नाम।।


मधुसिंघी (नागपुर)

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