गुरु की महिमा – एन्०पी०विश्वकर्मा

महर्षि वेद व्यासजी का जन्म आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को ही हुआ था, इसलिए भारत के सब लोग इस पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। जैसे ज्ञान सागर के रचयिता व्यास जी जैसे विद्वान् और ज्ञानी कहाँ मिलते हैं। व्यास जी ने उस युग में इन पवित्र वेदों की रचना की जब शिक्षा के नाम पर देश शून्य ही था। गुरु के रूप में उन्होंने संसार को जो ज्ञान दिया वह दिव्य है। उन्होंने ही वेदों का ‘ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद’ के रूप में विधिवत् वर्गीकरण किया। ये वेद हमारी संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं

गुरु की महिमा
18 दिसंबर गुरु घासीदास जयंती 18 December Guru Ghasidas Jayanti

गुरु की महिमा


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गुरु की महिमा में कभी,
सीमा रही न एक।
एक गुरू शिक्षण करें,
सीखें शिष्य अनेक।।
आदि शंकराचार्य जी,
गुरु का पा संकेत।
सन्यासी हो ही गए,
तजकर ग्राम-निकेत ।।
गुरु गोविन्द की सीख से,
कई शिष्य तैयार ।
धर्म विरुद्ध समूह का,
करने को प्रतिकार।।
तुलसी, सूर-कबीर भी,
गुरु से लेकर ज्ञान।
देवतुल्य पूजे गये,
विश्व विदित है मान।।
गुरु समर्थ की सीख से,
वीर शिवाजी राव।
रक्षा करते धर्म की,
सहे अनेकों घाव।।
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एन्०पी०विश्वकर्मा, रायपुर
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