KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

हाँ तू मेरी माता है- नेहा शर्मा

0 22

हाँ तू मेरी माता है- नेहा शर्मा



क्या ही लिखूं उसकी खातिर
जिसने खुद मेरी रचना कि,
कुछ शब्द नहीं उसके खातिर
जिसने खुद मुझको शब्द दिए।


कुछ कह पाऊं उसके हित में
उतना सामर्थ कहाँ मुझमे,
उसके अर्थों को समझ सकूँ
इतना भी अर्थ कहाँ मुझमे।


तू संग मेरे ज़ब होती है
हर मुश्किल राह बदलती है,
मैं कर्ज तेरा भूलूँ कैसे
जो बाहँ पकड़ तू चलती है।


तू परमपिता मेरे खातिर
तुझको मैं भूल सकूँ कैसे,
मैं अंश तेरा ही हूँ जननी
कलियों से फूल खिले जैसे।


भले बुरे का ज्ञान सदा
तुझसे हर कोई पता है,
और धन्य धन्य मैं धन्य सदा
कि हाँ तू मेरी माता है।।
नेहा शर्मा…..

Leave A Reply

Your email address will not be published.