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हिंदी संग्रह कविता-हम स्वदेश के सपूत

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हम स्वदेश के सपूत


हम स्वदेश के सपूत आज पग बढ़ा चले।


हाथ में अंगार, है हर चरण पहाड़ है।
हम बढ़े जिधर उधर आँधियाँ ही बढ़ चलें।
हम स्वदेश के सपूत आज पग बढ़ा चलें।


मातृभूमि तू न डर, धीर धर विश्वास धर।
शत्रु शीश बीनती है, यह दुधार जब चलें।
हम स्वदेश के सपूत आज पग बढ़ा चलें।


है यहाँ कलह न द्वेष, एक प्राण है स्वदेश,
जय हमारे हाथ में है, हम सभी विचार लें।
हम स्वदेश के सपूत, आज पग बढ़ा चलें।

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1 Comment
  1. वंशिका यादव अनुष्का (अनू) says

    🇧🇴🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳