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हंगामा क्यों कर रहे हो तुम – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

इस कविता में वीरों की कुर्बानियों की ओर ध्यान केन्द्रित कराने की एक कोशिश की गयी है |
हंगामा क्यों कर रहे हो तुम – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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हंगामा क्यों कर रहे हो तुम – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

छोटी सी बात पर, हंगामा क्यों कर रहे हो तुम
सियासत तुम्हारा ईमान नहीं , फिर क्यों झगड़ रहे हो तुम

कुर्बान हुई जवानियों को, कुछ तो सम्मान दो
राष्ट्र को सर्वोपरि समझो, यूं ही क्यों लड़ रहे हो तुम

पल – पल जिए , पल – पल मरे जो आजादी के लिए
उनकी वीरों की कुर्बानियों को , क्यों लजा रहे हो तुम

भगत सिंग, सुखदेव, बिस्मिल चढ़ गए, फांसी के फंदे पर
उनकी शहादत पर मगरमच्छी आंसू, क्यों बहा रहे हो तुम

महसूस नहीं की तुमने , उन जवां दिलों की धड़कन
क्यों उन वीरों के त्याग को झुठला रहे हो तुम

हंगामा करना हो गयी है तुम्हारी आदत
क्यों एक – दूसरे पर आरोप लगा रहे हो तुम

बात करो देश प्रेम की , बात करो विकास की
क्यों अपना बहुमूल्य समय गँवा रहे हो तुम

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