KAVITA BAHAR
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होली के रंग है हजार

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होली के रंग है हजार,खिल जाये होठों में बहार।
यारा मेरे दिलदार,तुझ संग मिला मुझे प्यार॥
ये हमारी मस्तानी टोली,मीठी बोली,सूरतिया भोली।
लोगों को मिलाये ऐसी होली,पानी ने रंग को जैसे घोली।
होली के रंग में डुबा संसार,होली के रंग है हजार।
होली के रंग है हजार,खिल जाये होठों में बहार॥1॥
क्या जमीं के रंग?क्या आसमाँ के रंग?
मिल गया दोनों के रंग, आज होली के संग।
कोई ना बचा आज लाचार, होली के रंग है हजार।
होली के रंग है हजार,खिल जाये होठों में बहार॥2॥
हम पिया के दीवाने,कौन -सा रंग दें ना जानें।
सारा तन रंग से गीला, फिर भी दिल ना मानें।
होली है रंग की बौछार, होली के रंग है हजार।
होली के रंग है हजार,खिल जाये होठों में बहार॥3॥
(रचयिता:-मनी भाई)
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