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जल बिना कल नहीं -महदीप जंघेल(जल संकट पर कविता)

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जल बिना कल नहीं -महदीप जंघेल(जल संकट पर कविता)

जल से मिले सुख समृद्धि,
जल ही जीवन का आधार।
जल बिना कल नही,
बिना इसके जग हाहाकार।

जल से हरी-भरी ये दुनिया,
जल ही है जीवन का द्वार।
जल बिना ये जग सूना,
वसुंधरा का करे श्रृंगार।

पर्यावरण दुरुस्त करे,
विश्व पर करे उपकार।
नीर बिना प्राणी का जीवन,
चल पड़े मृत्यु के द्वार।

जल,भूख प्यास मिटाए,
जीव -जंतु के प्राण बचाए।
सूखी धरणी की ताप हरे,
प्यासी वसुधा पर प्रेम लुटाए।

वर्षा जल का संचय करके,
जल का हम सदुपयोग करें।
भावी पीढ़ी के लिए बचाकर,
अमृत -सा उपभोग करें।

जल ही अमृत जल ही जीवन,
दुरुपयोग से होगा अनर्थ।
नीर बिना संसार की,
कल्पना करना होगा व्यर्थ ।

अतः जल बचाएं,उसका सदुपयोग करें।जल है तो कल है।

रचनाकार -महदीप जंघेल
निवास -खमतराई, खैरागढ़
जिला – राजनांदगांव(छ.ग)

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8 Comments
  1. Mahdeep says

    धन्यवाद, मुझे प्रेरित करते रहे।

  2. Dwarka ram janghel says

    Bahut sundar mahdeep bhai

  3. Mahdeep says

    धन्यवाद

  4. Padma sahu says

    बहुत सुन्दर सर जी

  5. Mahdeep says

    आशीर्वाद मिलता रहे।

  6. Anuradha singh says

    Bahut sundar Rachna

  7. Mahdeep says

    धन्यवाद

  8. Rina says

    बहुत सुन्दर प्रेरणादायक कविता बधाई हो।