KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

जल ही जीवन है -‌ अकिल खान ( जल संरक्षण कविता)

1 134

जल ही जीवन है -‌ अकिल खान ( जल संरक्षण कविता)



जल में मत डालो मल, फिर कैसे खिलेगा कमल।
वृक्षों की बंद करो कटाई, यही शुद्ध जल का हल।
जल है प्रलय, जल से होता निर्मल धरा गगन है ।
करेंगे अब जल संरक्षण ,क्योंकि जल ही जीवन है।

कल – कारखानों के अपद्रव्य , मानव की मनमानी,
करते परीक्षण – सागर में, होती पर्यावरण को हानि।
जल से हैं खेत – खलिहान – वन, मुस्कुराते चमन है,
करेंगे अब जल संरक्षण ,क्योंकि जल ही जीवन है।

बढ़ती आबादी से निर्मित हो गये विषैले नदी नाला,
कट गए कई वन बगीचे,हो गया जल का मुँह काला।
उठो जल बचाना अभियान है, कहता अकिल मन है,
करेंगे अब जल संरक्षण ,क्योंकि जल ही जीवन है।

भरेंगे तालाब-कुँआ,और करेंगे बाँध में एकत्र पानी,
हटाकर अपशिष्ट, खत्म करेंगे जल संकट की कहानी।
नदी झरने झील तालाब सुखे, बने मरुस्थल निर्जन है,
करेंगे अब जल संरक्षण ,क्योंकि जल ही जीवन है।

मानव अपना भविष्य बचा लो कहता है अब ये जल,
जल संकट होगी भयावह ,जानो आज नहीं तो कल।
विश्व एकता सुलझाएगी इसको, कहता अकिल मन है,
करेंगे अब जल संरक्षण ,क्योंकि जल ही जीवन है।

अकिल खान रायगढ़

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.

1 Comment
  1. Amita says

    जल ही जीवन है, जल संरक्षण पर बहुत सुंदर अभिव्यक्ति