जलती धरती/चन्दा डांगी

JALATI DHARATI

जलती धरती/चन्दा डांगी

JALATI DHARATI
JALATI DHARATI

बचपन मे हमने देखी
हर पहाड़ी हरी भरी
नज़र आता नही
पत्थर कोई वहाँ
कटते गये जब पेड़
धरती होने लगी नग्न सिलसिला ये चलता रहा
अब पत्थर नज़र आते
पेड़ो का पता नहीं
लाते थे हम सामान
कपड़े की थैलियों मे
अब पाॅलीथीन से
ये धरती पटी पड़ी
नल नहीं थे घरों मे
पानी का मोल समझते थे
घर घर लगे नलकूप
कोंख धरती की सुखा डाली
पेड़ है नही, अम्बर बरसता नही
सुरज के ताप से जलती धरती हमारी ।

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर
मंदसौर मध्यप्रदेश

Scroll to Top