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काम करो भाई काम करो – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

इस रचना के माध्यम से मैं लोगों को परिश्रम हेतु प्रेरित करने का एक प्रयास कर रहा हूँ । साथ ही परिश्रम आपको जिंदगी में क्या मुकाम दिला सकता है इस ओर सभी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ । काम करो भाई काम करो – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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काम करो भाई काम करो

काम करो भाई काम करो

जग में अपना नाम करो

कामचोर जो हो जायेगा

अँधेरे में खो जाएगा

विकसित एक आसमान करो

काम करो भाई काम करो

कायर जो तुम हो जाओगे

भीड़ में कहीं गुम हो जाओगे

हिम शिखर से अटल रहो तुम

अविचल अविराम बढ़ो तुम

खामोश जो तुम हो जाओगे

खुद को दिलासा क्या दे पाओगे

अंतर्मन में आस जगाओ

सारी दिल की पीर मिटाओ
संस्कारों पर ध्यान धरो

जग में अपना नाम करो

सागर सा कर चौड़ा सीना

लहरों को अपने नाम करो

साहस से खुद को सींचो तुम

विकसित एक आसमान करो

काम करो भाई काम करो

जग में अपना नाम करो

काम करो भाई काम करो

जग में अपना नाम करो

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