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कर्म कर कर्म कर – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

इस रचने में कर्म को प्रधानता दी गयी है |
कर्म कर कर्म कर – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

कर्म कर कर्म कर – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

पाप पुण्य के चक्कर में
मत पड़ प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
परिणाम की चिंता में
नींद हराम मत कर प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
जीवन बहती
धारा का नाम है
हो सके तो जीवन में
कुछ अच्छे काम कर ले प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
आत्मा पवित्र कर
परमात्मा में
लीन हो प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
सद्चरित्र धरती पर
जीवता हर मुकाम है
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
निराशा के झूले में
झूलना मत प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
योग का आचमन कर
आत्मा को पुष्ट कर प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
जीवन बहती नदी है
विश्राम ना कर प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
मन है चंचल पर
आत्मा पर अपनी
अंकुश लगा प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
जीना है धरा पर तो
पुन्यमूर्ती बन कर जी प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
सत्कर्म पूजनीय परमात्मा
दर्शन देत प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
जीवन लगाम कस
अल्लाह को सलाम कर प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
बंधनों के मोह में
तू ना पड़ प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
शांत स्वभाव
मृदु वचन बोल प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
निर्बाध तू बढ़ा चल
भक्ति का आँचल पकड़
जीवन राह विस्तार कर ले प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
साँसों की डोर की मजबूती का
भरोसा नहीं है
उड़ सके तो सद्ज्ञान के
आसमान में उड़ प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
अधर्म की राह छोड़
धर्म पथ से नाता जोड़
किस्मत संवार ले
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे
छूना है आसमान
पाना है उस पुण्यमूर्ति
परम परमात्मा को
जीवन को अपने
कर्म पथ पर निढाल
कर ले प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे

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