KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

हिन्दी कविता: काव्य विषय की विराटता-:- मनीभाई’नवरत्न’

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

काव्य विषय की विराटता
•••••••••••••••••••••••
(एक कवि का स्वयं पर व्यंग्य)
रचयिता:- मनीभाई’नवरत्न’


ये काव्य युग,
सम्मान का युग है।
चलो अच्छी बात है।
हमें खुशी है
एक कवि के होने के नाते,
समाज के कुछ तो काम आते।
पर ध्यान रहे ,
सारा श्रेय मुझे ही लेना बेमानी है।
चूंकि सम्मान की पीछे
और भी कहानी है।
कंगूरा सा कवि लालायित है
चमकने को जमाने में।
नींव सा रचना
अभी भी छटपटा रही है
पहचान पाने में।
बिन नींव के कंगूरे की
एक अधूरी दास्तां है।
कवि का वजूद भी तो
कविता से ही वास्ता है।
और कविता का वास्ता
ईश्वर, प्रकृति से,
सामाजिक रीति से।
दीन-हीन की दशा से
मौसम-रंग-दिशा से।
कवि तो बौना है
उस अर्जुन की भांति
जो यह समझ लेता
कि महाभारत युद्ध
अपने दम पर जीता।
जानके अनजान रहता
काव्य विषय की महत्ता
उसका विराट स्वरूप।
✒️ मनीभाई’नवरत्न’,