KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कोई आखिरी दिन नहीं होता

कोई आखिरी दिन नहीं होता

ज़माना भूल चुका

उन्हें जिन्होंने कभी प्यार को खरीदना चाहा,
मिटाना चाहा, बर्बाद करना चाहा-
प्रेमी युगलों को सदा से
लेकिन वे आज भी जिन्दा हैं–

कुछ कथाओं में एवं
कहीं बंजारों के कबीलों के गीतों में ठुमकते हुए|
प्यार ऐसे ही जिन्दा रहता है
जैसे- वृद्धाश्रम में यादें,
आज सहला रहे थे
अपने अंतिम पलों को
हम दोनों वो कह रही थी–

तुम्हारे पहले चुम्बन की उर्जा
अब तक कायम है वर्ना….
और मैं भी उसी दिन मर गया था–
जिस दिन तुम्हें पहली बार देखा था
जिन्दा तो मुझे तुम्हारी नज़रों ने रखा है|
वृद्धाश्रम में केक काटते हुए
प्यार आज अपनी हीरक जयंती मना रही है
मानो आज उनका ये आखिरी दिन हो!

वैसे बता दूँ आपको प्यार के लिए
कोई आखिरी दिन नहीं होता
और प्यार कभी मरता नहीं
यह सिर्फ देह बदलता है ज़माने बदलते हैं |

रमेश कुमार सोनी LIG 24 कबीर नगर रायपुर छत्तीसगढ़ 7049355476

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