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कोरोना – कविता – कोरोना विषय पर कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

इस रचना में कोरोना से बचाव के लिए लोगों को प्रेरित किया गया है |
कोरोना – कविता – कोरोना विषय पर कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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कोरोना – कविता – कोरोना विषय पर कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

इंसानियत की आजमाईश है कोरोना
कहता है कोरोना कहता है कोरोना

अपने बड़ों का सम्मान कर न
एक दूसरे को नमस्ते और राम – राम करो न

उड़ा ले जाऊंगा मैं तुमको सूखे पत्तो न की तरह
स्वयं पर अभिमान करो न

संस्कृति , संस्कारों पर विश्वास धरो न
एक दूसरे पर अविश्वास करो न

रिश्तों की डोर की पकड़ को बनाए रखो
इंसानियत का ज़ज्बा बनाये रखो न

मुसीबत के इस दौरे – कोरोना में
उस खुदा पर एतबार करो न

कहता है कोरोना कहता है कोरोना

धर्म कर्म की राह चलो न
वर्णशंकर प्रजाति से
इस धरा को प्रदूषित करो न
अपने धर्म पर विश्वास करो न

मंदिर, चर्च, गुरूद्वारे और मस्जिद तेरे लिए हैं
उस खुदा से अपना दर्द एक बार कहो न

चंद पुष्प उसके चरणों में अर्पित कर दो
और उस खुदा से गुजारिश करो
इस कोरोना से हमें मुक्त करो न

इस कोरोना से हमें मुक्त करो न
इस कोरोना से हमें मुक्त करो न

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