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हिंदी दिवस विशेष: क्या हम हिंदी हैं -मनीभाई ‘नवरत्न’

क्या हम हिंदी हैं -मनीभाई ‘नवरत्न

घर में मिले जो , सम्मान नहीं है
राष्ट्रभाषा का अब ध्यान नहीं है
कैसे बचेगी  हिंदी की अस्मिता ?
क्या हम हिंदी हैं ?पूछती कविता
यूं तो बड़ी सरल प्यारी सी है भाषा.
राष्ट्र की एकता के लिए बनी आशा .
विकसित देशों की होती स्वतंत्र भाषा
पर देश ने स्वयं को गुलामी में फांसा ?
क्या अब गीता,
मानस में अभिमान नहीं है ?
घर में मिले जो , सम्मान नहीं है
राष्ट्रभाषा का अब ध्यान नहीं है
ज्ञान है भाषा में , विज्ञान भी समाया
दूर-दूर देशों तक , नाम भी कमाया ।
संतों की भाषा , संस्कृति को  बचाया
सात सूरों के , गीत संगीत भी रचाया
अनेकों है भाषा पर ,
हिंदी सा जुबान नहीं है।
घर में मिले जो , सम्मान नहीं है
राष्ट्रभाषा का अब ध्यान नहीं है
 मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़
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