
मां विषय पर दोहे
(1)
*हमे सुलाए सूख में*,मां गीले में सोय।
उसके इस उपकार का,मोल नही है कोय।
(2)
*माँ से अच्छा कौन है*,दुनिया में सरताज।
*सुंदरता में मंद है*,उससे भी मुमताज।।
(3)
दुनिया में निर्माण की, माता ही है मूल।
कृपा होय तो दूर हों, सकल जगत के शूल।
(4)
नहीं मातु बिन होत है, दुनिया का कल्याण।
चरणों मे सिर जा पड़े,सबका हो कल्याण।
©✍️रामेश्वर प्रसाद’करुण’,दौसा

सुंदर सृजन
बहुत ही बेहतर