
माता रानी की कृपा
माता रानी की कृपा,
सब पर एक समान।
होती है यह समझिए,
त्याग सकल अभिमान ।।
माता के दस रूप हैं,
विद्याओं के नाम।
सिद्धि प्राप्त जिसको हुई,
बन जाते सब काम ।।
काली, तारा और हैं,
छिन्नमस्तिका मात।
सोडसी भुवनेश्वरी,
त्रिपुर भैरवी ख्यात।।
धूमावति बगला मुखी,
जग मे अधिक प्रसिद्ध।
मातंगी, कमला सदा,
करें साधना सिद्ध।।
इनके क्रमशः भोग भी,
रुचिकर हैं विख्यात ।
दुग्ध, शर्करा ,घृत तथा,
मालपुआ लग जात।।
कदली फल गुड़ के सहित,
श्रीफल लाई भोग।
अर्पित करते मातु को
जो हैं जिसके जोग ।।
सरस्वती आराधना ,
करने वाले लोग ।
सदा अविद्या दूर के,
पाते हैं सुख भोग।
सब माता विद्या सदृश,
पूरी जायें आज।
लेकर आशीर्वाद शुभ,
होगा सुखी समाज।।
एन्०पी०विश्वकर्मा, रायपुर

