KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

मेरा परिवार- शंकर आँजणा ( परिवार दिवस पर कविता)

सभी को विश्व परिवार दिवस की शुभकामनायें

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मेरा परिवार- शंकर आँजणा


दिए की बाती समान हूँ मैं
सदा अपनो के लिए जलता हूँ।

रोशनी देता हूं परिवार को सदा मैं
उनके लिए दिल में उमंगें रखता हूँ ।

चाहे कितनी भी बाधाओं में फंसा हूँ मैं
सदा परिवार के लिए ही खड़ा रहता हूँ ।

आंच न आये परिवार पे सोचता हूँ मैं
खुद को दीये सा जलाये रखता हूँ ।

यूं तो परेशानियां बहुत आती जीवन में
लो उनसे भी दो-दो हाथ करता रहता हूँ ।

मेरा परिवार भी जान लुटाए मुझ पर ,
बस इसलिए मैं भी मजबूत खड़ा रहता हूँ।

दीए की बाती समान हूँ मैं
सदा अपनो के लिए जलता हूँ।

दीए का काम हैं जलकर रोशनी देना हरेक को।
चाहता हूँ कष्ट झेलके ,मैं रोशन करूं अपनों को ।


शंकर आँजणा नवापुरा धवेचा
बागोड़ा जालोर-343032
कक्षा स्नातक तृतीय वर्ष
मो.8239360667

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4 Comments
  1. शंकर says

    धन्यवाद

  2. Parkha ram says

    Super

  3. शंकर says

    धन्यवाद

  4. Krishan patel says

    बहुत ही शानदार