KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

मेरे सांसों ने तेरे कानों में

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मेरे सांसों ने तेरे कानों में

मेरे सांसों ने तेरे कानों में
अपने दिल का पैगाम दिया ।
गुजरी तुझ पर क्या जानेमन ?
क्या इसका अंजाम हुआ?

धोखा में ना रखना ,सनम तू मुझको ।
बरसों से चाहत है चाहे तू मेरे दिल को ।
खफा होने की बात क्या है ?
ख्वाब तेरे हो तो जुदाई रात क्या है?
यादों में तेरे रात दिन हुआ,
दिन से फिर शाम हुआ।।

तारीफे ना करूं तो तुझ पर साजिश होगी ।
चाहता रहूं बस तुझको मेरी ख्वाहिश होगी ।
सांसो की सांसो से , सांसों में ऐतबार ।
नजरों की नजरों से , नजरों में इंतजार।
दिन की मोती शाम की ज्योति को मैंने जान लिया।।

– Lyrics by Manibhai