KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

विश्व बचत दिवस: मितव्ययता का महत्व बताती वर्षा जैन “प्रखर” की यह शानदार कविता, आप जरूर पढ़िये

*विश्व बचत दिवस*

**********************
खुशियाँ मोहताज नहीं पैसों की
यह तो सत्य है मेरे भाई। 
फिर भी मुस्कान नहीं होठों पर
जब तक हाथ में ना हो पाई। 
फिजूलखर्ची से बचो ही हरदम
खर्च करो तुम सोच समझकर। 
आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया
ऐसा कभी ना करना भैया। 
दो पैसों की बचत ही हरदम
काम आएगी आगे चलकर। 
हरदम बचे रहो कर्जे से
सुखमय जीवन बीते मजे से। 
अपने बच्चों को भविष्य दो
पंख सुनहरे सपनों के दो। 
बाट जोहती उनकी आँखें
प्रश्न वाचक ना बनके टपके। 
जितनी हो तुम में क्षमता
उतनी ही तुम रखना समता। 
देख दूसरों की बढ़ती को
किश्त में ना तुम बढ़ना भैया। 
नकदी देकर खुशियाँ लो
उधार में ना तुम पैसा लो। 
एक-एक बूँद से भरता गागर
नदियाँ मिलती बनता सागर। 
सोच-समझ कर खर्चो पैसे
ताकि आगे भविष्य ना तरसे। 
बात पते की आज जान लो
मितव्ययता है सार जान लो।
************************
वर्षा जैन “प्रखर”
दुर्ग (छत्तीसगढ़)