KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

मुस्कुराता हुआ प्रेम

मुस्कुराता हुआ प्रेम


प्रेम नहीं कहता कि–
कोई मुझसे प्रेम करे
प्रेम तो खुद बावरा है
घुमते–फिरते रहता है
अपने इन लंगोटिया यारों के साथ–
सुख–दुःख,घृणा,बैर,
यादें और हिंसक भीड़ में;

प्रेम सिर्फ पाने का ही नहीं
मिट जाने का दूसरा नाम भी है|
प्रेम कब,किसे,कैसे होगा?
कोई नहीं जान पाता है
ज़माने को इसकी पहली खबर मिलती है,
यह मुस्कुराते हुए मलंग के जैसे फिरते रहता है;

कभी पछताता भी नहीं कहते हैं
लोग कि–
प्रेम की कश्तियाँ डूबकर ही पार उतरती हैं|
मरकर भी अमर होती हैं
लेकिन कुछ लोगों में
यह प्रेम श्मशान की तरह दफ़न होते हैं
वैसे भी यह प्रेम कहाँ मानता है–

सरहदों को, जाति–धर्म को
ऊँच–नीच को
दीवारों में चुनवा देने के बाद भी
हॉनर किलिंग के बाद भी
यह दिख ही जाता है
मुस्कुराता हुआ प्रेम
मुझे अच्छा लगता है….|

रमेश कुमार सोनी LIG 24 कबीर नगर रायपुर छत्तीसगढ़ 7049355476

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