कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

कइसे के लगही जाड़ !/ राजकुमार ‘मसखरे

हिंदी कविता

कइसे के लगही जाड़ ! दुंग-दुंग ले उघरा बड़े बिहनियाझिल्ली,कागज़ बिनैया ल देख,कचरा म खोजत हे दाना-पानीतन  म लपटाय फरिया ल देख ! होत मूंदराहा ये नाली, सड़क मखरेरा,रापा के तैं धरइया ल देख,धुर्रा, चिखला म जेन सनाय हवैअइसन बुता के करइया ल देख ! मुड़ म उठाये बोझा,पेलत ठेलादुरिहा ले आये हे,दुवारी म देख,हाँका […]

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जुल्मी अगहन पर कविता / शकुन शेंडे
बचेली

प्रकृति और पर्यावरण

    जुल्मीअगहन जुलुम ढाये री सखी, अलबेला अगहन!शीत लहर की कर के सवारी, इतराये चौदहों भुवन!! धुंध की ओढ़नी ओढ़ के धरती, कुसुमन सेज सजाती।ओस बूंद नहा किरणें उषा की, दिवस मिलन सकुचाती।विश्मय सखी शरमाये रवि- वर, बहियां गहे न धरा दुल्हन!!जुलूम….. सूझे न मारग क्षितिज व्योम- पथ,लथपथ पड़े कुहासा।प्रकृति के लब कांपे-न बूझे,वाणी की

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बचेली
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जंगल पर कविता: प्रकृति का जादू और अद्भुत अनुभव (2024)

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

जंगल पर कविता के माध्यम से प्रकृति का महत्व, पर्यावरण संरक्षण, और वन्यजीवन का समर्थन सीखें। इस लेख में जानें कि कैसे जंगल पर कविताएँ हमें पर्यावरण से जोड़ती हैं।

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Haathi par kavita : 5 बेहतरीन हाथी पर कविताएँ

प्रकृति और पर्यावरण

“हाथी पर कविता” पढ़ें और जानें इस अद्भुत प्राणी की महानता को। हाथी की कविताओं से प्रेरणा और ज्ञान पाएं। हाथी, हमारे ग्रह का एक अनोखा और शक्तिशाली प्राणी है जो अपनी विशालता, समझदारी, और सामाजिकता के लिए प्रसिद्ध है। चाहे जंगल का राजा हो या किसी धार्मिक स्थल का प्रतीक, हाथी हमेशा से मानव

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तुलसी विवाह पर कविता

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

तुलसी विवाह पर कविता पौराणिक कथा पर आधारित है और वृंदा और भगवान विष्णु के अवतार जालंधर की कहानी को प्रस्तुत करती है। गंगा द्वारा श्रीहरि को श्राप देने से लक्ष्मी को धरती पर दो रूपों में जन्म लेना पड़ा – एक वृंदा के रूप में, जिसने कठिनाइयों का सामना किया और दूसरी पद्मा नदी

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प्रकृति पर दोहे/रेखराम साहू

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

प्रकृति पर दोहे/रेखराम साहू प्रकृतिजन्य जीवन सभी,रहे नित्य यह ज्ञान।घातक जो इनके लिए, त्याज्य सभी विज्ञान।। प्रकृति बिना जीवन नहीं,प्रकृति प्राण आधार।जीवन और प्रकृति बिना,धन-पद सब निस्सार।। जीवन पोषक हों सभी, धर्म-कर्म के कोष।धर्म-कर्म परखे बिना, दुर्लभ है संतोष।। देश-काल संदर्भ में, हितकारी व्यवहार।मानक धर्मों का यही,करे विश्व स्वीकार।। हर युग के इतिहास में, निहित

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कवि / कविता पर कविता/ राजकुमार ‘मसखरे

आध्यात्म और भक्ति

कवि / कविता पर कविता/ राजकुमार ‘मसखरे आज़कल  कवि  होते नही हैंवे सीधे ही  कवि बन जाते हैं,कुछ लिखने व मंथन से पहलेकोई  नकली  ‘नाम’ जमाते हैं ! यही कोई ‘उपनाम’ लिख करफिर नाम  मे ‘कवि’  लगाते हैं,दो,चार रचना क्या लिख डाले‘भाँटा-मुरई’ को सही बताते हैं ! ‘पताल चटनी’ लिख- लिख करये समृद्ध साहित्यकार कहाते

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जब भी दीप जलाना साथी/ हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश

हिंदी कविता

जब भी दीप जलाना साथी जब भी दीप जलाना साथी,उर के तमस मिटाना साथी।1। भेद-भाव सब भूल प्यार से,सबको गले लगाना साथी।2। दो दिन का यह मेला जीवन,हॅसना साथ हॅसाना साथी।3। महल-दुमहले और झोपड़ी,सबको खूब सजाना साथी।4। घर-आंगन खलिहान हमारे,दीप-ज्योति बिखराना साथी।5। वीर-शहीदों की सुधियों में,मन्दिर दीप सजाना साथी।6। धर्म सनातन को पहचानो,संस्कार अपनाना साथी।7।

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दीपावली मुबारक /शिवराज सिंह चौहान

हिंदी कविता

दीपावली मुबारक सबको  बारम्बार  मुबारक।दीपावली त्यौहार मुबारक।।🪔मेरे राम पधारे जब अयोध्या,उस दिन की यादगार मुबारक।🪔तिमिर भगाए जो जीवन का,खुशियों का उजियार मुबारक।🪔इक दूजे को जो करते रोशन,दीपों की वो कतार मुबारक।🪔बम्ब, पटाखे, फूल-झड़ी  संग,चकरी, राकेट, अनार मुबारक।🪔कर महा लक्ष्मी पूजन, वंदन,धन, दौलत अम्बार मुबारक।🪔‘शिव’ की मंगल कामना वाला प्यार  भरा  उपहार  मुबारक। दीपावली की शुभ

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गोवर्धन पूजा /  डॉ. मनोरमा चन्द्रा ‘रमा

हिंदी कविता

गोवर्धन पूजा मात देवकी लाल की, लीला है अनमोल।बचपन से मोहित किए, उनकी मीठी बोल।। राधे के प्रियतम हुए , मीरा के हैं नाथ।ग्वाल बाल के बन सखा, देते भक्तों साथ।। मात पिता रक्षक बने, वासुदेव के लाल।दुष्ट कंस संहार कर, बने भक्त प्रतिपाल।। सेवक बनके गाय का, रूप धरे प्रभु ग्वाल।गोवर्धन पर्वत उठा, काट

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शिक्षा संसार / शिवराज सिंह चौहान

हिंदी कविता

शिक्षा संसार मात शारदे को नमन,                कर दिया मुझे निहाल।हंसी खुशी पूरे हुए,                    साढ़े अट्ठाइस साल।। भुला कभी ना पाऊंगा                      वो आदर सत्कार।मिला मान सम्मान मुझे,                  और सभी का प्यार।। जाने अंजाने में कोई,                     हरकत हुई फिजूल।गर गलती मुझसे हुई,                   जाना सब कुछ भूल।। मुझे बहुत कुछ दे दिया,                      तूने शिक्षा संसार।कभी चुका ना पाऊंगा,                    

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शुभ दीपावली / स्वपन बोस,, बेगाना,,

हिंदी कविता

शुभ दीपावली दीपावली की शुभ दिन आज आया है।जगमग, जगमग हर घर द्वार सजा है।दीपावली की शुभ दिन आया है। दूर हो दुःखों का अंधेरा सबने अपने आंगन में उम्मीद की दीपक जलाया है।सच्चा दीपावली उसी का है, जिसके हृदय में प्रेम समाया है।दीपावली का शुभ दिन आया है। चौदह वर्ष की‌ वनवास काटकर सिया

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