कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

अपनी ही मूर्खता पर हँस पाना

हिंदी कविता

Laughing at Your Own Idiocy(अपनी ही मूर्खता पर हँस पाना)(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) बुद्धिमान बनने कीशुरुआततभी होती है,जबतुम अपनी मूर्खतादेख पाते हो। मनुष्य होने का अर्थसिर्फ़ कोमलता नहीं—इसमेंउन्मादी क्रोध है,अविराम वासना है,बेईमानी कीभयानक खिंचाव है। ये कोई अपवाद नहीं,ये जीवन कीप्राकृतिक शक्तियाँ हैं।वे इसलिए नहीं उठतींकि तुम खराब हो,वे इसलिए उठती हैंक्योंकितुम जीवित हो।

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(स्पष्ट को चूक जाना)

हिंदी कविता

Missing the Obvious(स्पष्ट को चूक जाना)(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता) तुमकिसी रहस्य से वंचित नहीं हो—तुमस्पष्ट को हीदेख नहीं रहे। जो ठीकतुम्हारे सामने घट रहा है,वहीनज़र से फिसल जाता है। किसी कोनमस्ते कहना,दफ़्तर तकचलते जाना,किसी कीयूँ ही कही बात—सबतुम्हें बहा ले जाते हैं,बिना प्रतिरोध। घटनाएँतुम्हारी अनुमति के बिनाभीतर घुस आती हैं—और तुमउन्हेंसत्य मान लेते हो।

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स्वयं को पराजित करो

हिंदी कविता

स्वयं को पराजित करो सबसे बड़ा युद्धकिसी और से नहीं—अपने ही भीतर है। इच्छाएँ हैं,हितों पर खतरे हैं,जीवनलगातार चुनौती है—और हाँ,उसी में आनंद भी छिपा है। हम हारते हैंऔर चकित रह जाते हैं—मैं क्यों नहीं जीत पा रहा?क्यों हर बारखुद से हीपीछे रह जाता हूँ? ध्यान से देखो—हार बाहर से नहीं आती।वह भीतर जन्म लेती

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एक अग्नि से अगली अग्नि तक

हिंदी कविता

एक अग्नि से अगली अग्नि तक सूची पूरी करने वाले लक्ष्यदेह को चाहिए—टिक लग सके,इनाम मिले,नाम चमके। पर चेतनाकुछ और खोजती है—इतना विशाल,इतना उज्ज्वल,कि जीवन भर दौड़ोफिर भीपूरा न हो। इसलिएवही चुनोजिससे प्रेम करनाटालना असंभव हो।या ऐसा काम चुनोजो इतना बड़ा होकि प्रेमअपने आपजन्म ले। पूछो खुद से—क्या हैजो मैं बिना दाम के भी कर

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पूर्णता नहीं, निरंतरता

हिंदी कविता

पूर्णता नहीं, निरंतरता पूर्ण होना लक्ष्य नहीं,खड़ा रहना लक्ष्य है।गिरकर भीपीठ न दिखाना—यही जीवन है। लड़ाई शुरू करने से पहलेइतना जान लो—क्या मूल्यवान है,और किसके लिएतुम हार स्वीकार नहीं करोगे। सौ बार गिरो,सही दिशा में गिरो।कीमत चुकानी पड़े—तो चुकाओ।गहराई सस्ती नहीं होती। आसानी मत माँगो।तालियाँ मत चाहो।ईमानदारी का रास्ताआराम के लिए नहीं होता। जब वार

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इच्छा को मारो मत, शुद्ध करो

हिंदी कविता

इच्छा को मारो मत, शुद्ध करो इच्छा अपराध नहीं है।आकर्षण पतन नहीं है।गलती चाहने में नहीं,गलती उस दिशा में हैजहाँ तुम चाह रहे हो। इच्छा आग है—उसी आग सेदीपक जलता है,उसी से घर भी जलते हैं। समस्या यह नहींकि तुम दौड़ते हो,समस्या यह हैकि तुम किसके पीछे दौड़ते हो। तुम मृगमरीचिका सेप्यास बुझाना चाहते हो,छाया

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पृथ्वी जलती है क्योंकि तुम जलते हो

हिंदी कविता

पृथ्वी जलती है क्योंकि तुम जलते हो भूख पेट में नहीं,मन में रहती है।अंधी, बेचैन,कभी न भरने वाली—और उसी नेसब कुछ खा लिया। तुम गलत जीकरसही उपभोग कीआशा कैसे करते हो? धरती से रिश्तातुम्हारे जीवन जैसा है—टूटा हुआ,अचेत,लालची। सही जीवनकिसी नीति से नहीं,जागरूकता से शुरू होता है। जीवित होनासचेत होना है।और सचेत होनाखुद को जानना

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सुख से परे

हिंदी कविता

सुख से परे जीवन का उद्देश्यसुख नहीं है,सुख पाने कीबेचैनी से मुक्ति है। पैसा?सफलता?खुशी?इतने छोटे लक्ष्यइतने विशाल जीवन के लिए—कितनी अजीब सौदेबाज़ी। जिस सुख कोतुम जानते हो,वह सिखाया गया है,पालित है,क्षणिक उत्तेजना कानाम बदल दिया गया है। और वहदुख के बिनाजी ही नहीं सकता। सुख चाहिएतो पहले दुख चाहिए—गहरा सुख चाहिएतो गहरा दुख चाहिए।यही हैखुशी

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लत का अंतिम इलाज

हिंदी कविता

लत का अंतिम इलाज लतकोई बीमारी नहीं,एक खाली जगह हैजो शोर मचाती है। तुम लौटते हो—बार-बार—क्योंकिवहाँ कुछ मिलता है।झूठा सही,पर मिलता तो है। अगर कुछ न मिलता,तो तुम जाते ही क्यों? टीवी दोषी नहीं।मोबाइल दोषी नहीं।पोर्न, पैसा, नशा—कुछ भी दोषी नहीं। दोषतुम्हारी ज़रूरत है। एक भीतर कारोता हुआ गड्ढा,जो कहता है—“कुछ दो…कुछ भी दो।” तुम

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तुम्हारे लक्ष्य तुम्हारे नहीं

हिंदी कविता

तुम्हारे लक्ष्य तुम्हारे नहीं मन में उठने वालीकोई भी लहरअकेली नहीं उठती।मन दुनिया से बना है,और दुनियामन से। आतंकी का लक्ष्य—मारना। एक का लक्ष्य—मंदिर।दूसरे का—मस्जिद। मक्खी का लक्ष्य—गंदगी। हार्मोन से चलती देह का लक्ष्य—भोग। लालची मन का लक्ष्य—पैसा। ऊबे हुए मन का लक्ष्य—मनोरंजन। निर्भर मन का लक्ष्य—स्वीकृति। असुरक्षित मन का लक्ष्य—सहारा। तो मनआख़िर पीछा किसका

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आनंद — सबसे कठिन सुख

हिंदी कविता

आनंद — सबसे कठिन सुख(Joy: The Hardest Pleasure) आनंदसाधारण सुख नहीं है।वह ऊपर उठाता है—और इसलिएकठिन है। सस्ते सुखआसानी से मिल जाते हैं।खुद को बेचो,नशे में डूबो,भूल जाओ—कुछ ही पल में। ये सुखतुम्हें नहीं उठाते,तुम्हें घटाते हैं। पर बिना सुखजीवन भी नहीं चलता।तो चुनाव करो—नीचे गिरने का,या ऊपर उठने का। ऊँचा सुखमाँगता है—संयम,सजगता,बुद्धि,और समर्पण। इसीलिएअधिकांश

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जीत से पहले पूछो—तुम क्या जीत रहे हो?

हिंदी कविता

जीत से पहले पूछो—तुम क्या जीत रहे हो? हर जीतसफलता नहीं होती।अगर लक्ष्य ही मूर्खतापूर्ण हो,तो तेज़ी से पहुँचना भीकोई गौरव नहीं। भीड़ को खुश करने के लिएदौड़ना,अंधी चाह के पीछेभागना—यह कर्म नहीं,भटकाव है। पहले जानो—तुम कौन हो,और तुम्हें सच में चाहिए क्या। क्योंकिगलत युद्ध में मिली जीतहार से भी बदतर होती है। यह मत

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