कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

अंधा बंधन, आजीवन कारावास

हिंदी कविता

अंधा बंधन, आजीवन कारावास यदिबुद्धिमान होकरविवाहित हो—सुंदर। यदिबुद्धिमान होकरअविवाहित हो—वह भीसुंदर। मुद्दाविवाह नहीं,मुद्दाबुद्धि है। मुझेविवाह सेन पक्ष है,न विरोध। मुझेउस मन मेंरुचि हैजोसुरक्षा की ओरभागता है,जोकिसी दूसरे कोअपना बनाकरक़ैद करना चाहता है। उसी मन कोदेखनाज़रूरी है। विवाहकेवलसाथ रहने कानाम नहीं—वहकाम की दिशा बदल देता है,संतानों सेरिश्ता गढ़ देता है,जीवन केलगभग हर कोने कोछू लेता है।

अंधा बंधन, आजीवन कारावास Read More »

व्यक्ति नहीं, प्रभाव देखो

हिंदी कविता

व्यक्ति नहीं, प्रभाव देखो सही संबंधसही व्यक्ति खोजने सेनहीं बनता। पहलेअपने कोकिसीसार्थक कार्य मेंलगाओ—औरजो तुम्हेंउस कार्य कोपूरा करने मेंसहायक हो,वहीसंबंध के योग्य है। उचित संगतिवरदान होती है।यदिकिसी का साथमन कोप्रकाश दे,जीवन कोऊपर उठाए—तोस्वयं कोउससेवंचित मत करो। विवाह क्या है?सबसे पहले—साथ निभाने कीएक व्यवस्था। दशकों तककिसी के साथरहने कानिर्णय। इसलिएसबसे बड़ा प्रश्नयह नहीं किवह कौन है,बल्कियह

व्यक्ति नहीं, प्रभाव देखो Read More »

संबंध से पहले संपूर्ण बनो

हिंदी कविता

संबंध से पहले संपूर्ण बनो किसी कायोग्य साथी बनने से पहलेक्यायोग्य मनुष्यबनना आवश्यक नहीं? अकेलापनसीखो। दूसरों सेजुड़ने से पहलेअपने साथरहना सीखो—आसानी से,सहजता से,खुशी से। यदितुम स्वयं के साथबैठ नहीं सकते,तोकृपयाकिसी और परभार मत बनो। जोअपने भीतरठीक नहीं है,वहदूसरे परसवार क्यों हो? अक्सरहमदूसरे के पासइसीलिए जाते हैंक्योंकिहमअपने पासरुक नहीं पाते। यह भी सत्य है—हमेंसंबंधों मेंजीना है।हमद्वीप

संबंध से पहले संपूर्ण बनो Read More »

उनकी तड़प तुम्हारी ही है

हिंदी कविता

उनकी तड़प तुम्हारी ही है यदितुम्हें याद हैअपनी ही बेड़ियाँ,अपनी ही मुक्ति कीअधूरी पुकार—तोतुमदूसरों कीखामोश कैद कोमहसूस करने लगते हो। तबदूसरों की आँखों मेंजो चाहकभी कही नहीं गई,वहतुम्हेंचुभने लगती है। जब तुमसच मेंअपने आप सेप्रेम करते हो,तोएक सत्यउजागर होता है—तुम्हारी भलाईऔरदुनिया की भलाईअलग नहीं। साधारण प्रेमसौदे जैसा है—सुख के बदले सुख,आराम के बदलेआराम। कभीरिझाना,कभीरिझ जाना।

उनकी तड़प तुम्हारी ही है Read More »

अनंत से प्रणय

हिंदी कविता

अनंत से प्रणय अनंतन कल्पना है,न कल्पना के पार कोई लोक—अनंत हैअपनी सीमाओं कोनिरंतरललकारते रहना। तुमसेअसंभव नहीं माँगा गया,बस इतना कहा गया है—जो हो सकता है,उसेपूरा करो। सीमा तोड़ो मत,सीमा तक पहुँचो।क्षमता बढ़ाओ मत,क्षमता कोखर्च कर दो। यही चुनौती है—आगे निकलना नहीं,खुद कोथका देनासार्थकता में। जब तुमसच मेंसब दे देते हो,तभीपरिणामदिखाई देने लगते हैं। और

अनंत से प्रणय Read More »

रिक्तता की प्रतिध्वनियाँ

हिंदी कविता

रिक्तता की प्रतिध्वनियाँ अधूरा मनअधूरे मन सेपूर्णता माँगता है—जैसेदो भिखारीएक-दूसरे सेअरबपति बनने कीआशा करें। यह आशाकभी पूरी नहीं होती। जब तुम सोचते हो—कोई आएगाजो मन को शांति देगा,घर को पवित्रता,तो तुमनिराशा कोआमंत्रण दे रहे होते हो। देखो उन युगलों को—वह सोचती हैवह उसे मजबूती देगा,जीवन का आधार बनेगा।पर वहन शरीर से सीधा है,न चेतना से।

रिक्तता की प्रतिध्वनियाँ Read More »

मैं तुमसे प्यार करता हूँ, सच में?

हिंदी कविता

मैं तुमसे प्यार करता हूँ, सच में? जिस क्षणतुम्हारी ज़रूरतपूरी नहीं होती,उसी क्षणजिसे तुम प्रेम कहते थेवहझुँझलाहटऔरआरोप में बदल जाता है। एक दुर्भाग्यपूर्ण जोड़ा है— वह सीधे नहीं कहती—“मुझे एक ड्रेस चाहिए।”वह कहती है—“डार्लिंग,तुम मुझसे प्यार ही नहीं करते।” और वह समझ जाता है—ड्रेस चाहिए। वह भीसीधे नहीं कहताकि उसे क्या चाहिए।वह बस कह देता

मैं तुमसे प्यार करता हूँ, सच में? Read More »

जब नज़दीकी एक पिंजरा बन जाती है

हिंदी कविता

When Closeness Becomes a Cage(अतुकांत हिंदी कविता – भावानुवाद) सच्चा प्रेमतुम्हें मुक्त देखना चाहता है,झूठा प्रेमतुम्हेंअपनी आदत बनाना चाहता है। जो रिश्तानिर्भरता पर खड़ा है,वहस्वस्थ नहीं हो सकता। जहाँदूसरा व्यक्तितुम्हारे सुख–दुख काकेन्द्र बन जाए,वहाँचेतावनी कीघंटी बजनी चाहिए। सब ठीक दिखेतब भीखुद से पूछते रहो— क्या मैंनिर्भर तो नहीं हो गया?क्या मैंअनजाने मेंशोषक तो नहीं बन

जब नज़दीकी एक पिंजरा बन जाती है Read More »

तुम वही बन जाते हो, जो भीतर लेते हो

हिंदी कविता

तुम वही बन जाते हो, जो भीतर लेते हो साथमासूम नहीं होता।वहधीरे-धीरेतुम्हें गढ़ता है। जीवन कोसबसे तेज़और सबसे गहरेकुछ बदलता है—वह हैसंगति।वातावरण। इसलिएसतर्क रहो। किससे मिलते हो,क्या पढ़ते हो,क्या देखते हो,क्या सुनते हो,क्या खाते हो—यह सबतुम्हारे भीतरउतर रहा है। अंधाधुंधकुछ भीअंदर मत आने दो। इंद्रियाँहर क्षणपी रही हैं।औरतुम वही बनते होजोवे पी लेती हैं। हाँ,एक

तुम वही बन जाते हो, जो भीतर लेते हो Read More »

प्रेरणा का अंत, स्पष्टता की शुरुआत

प्रेरणा और सकारात्मकता, हिंदी कविता

प्रेरणा का अंत, स्पष्टता की शुरुआत जब प्रेरणाबाहर से आती है,तोवह बाहर के साथ हीखत्म हो जाती है। कोई भी बाहरी चिंगारीहमेशाजल नहीं सकती। हम अक्सरकिसी लक्ष्य के पीछेइस भरोसे से दौड़ते हैं—किजब यह मिल जाएगा,तबमैं पूरा हो जाऊँगा। यह भावनाअजनबी नहीं है। अभी मैं पर्याप्त नहीं हूँ,परउस मुकाम पर पहुँचकरमुझेखुद को अच्छा महसूस करने

प्रेरणा का अंत, स्पष्टता की शुरुआत Read More »

रिश्तों का गुलाल – परिवार और प्रेम के रंगों का प्रतीक चित्र

रिश्तों का गुलाल – प्रेम और विश्वास की हिंदी कविता

प्रेम और रिश्ते, हिंदी कविता

इस कविता में रिश्तों का गुलाल हिंदी कविता रिश्तों की मिठास, विश्वास और प्रेम के रंगों को उजागर करती है। यह कविता बताती है कि कैसे सच्चे रिश्ते जीवन को रंगीन बनाते हैं। भूमिका जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति धन नहीं, बल्कि रिश्ते होते हैं। रिश्ते वे रंग हैं जो जीवन की सूनी दीवारों को

रिश्तों का गुलाल – प्रेम और विश्वास की हिंदी कविता Read More »

मन का अबीर

मन का अबीर: समकालीन विद्रूप पर एक हिंदी कविता

समाज और यथार्थ

इस कविता में: ‘मन का अबीर’ शीर्षक के अंतर्गत आधुनिक समाज के खोखलेपन और दिखावे पर कटाक्ष करती यह हिंदी कविता मानवीय संवेदनाओं के असली रंगों की तलाश करती है। भूमिका होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि अंतर्मन के उन धूसर कोनों को रंगने का अवसर है, जहाँ नैतिकता और संवेदनाएं जमी हुई हैं।

मन का अबीर: समकालीन विद्रूप पर एक हिंदी कविता Read More »

Scroll to Top