अंधा बंधन, आजीवन कारावास
हिंदी कविताअंधा बंधन, आजीवन कारावास यदिबुद्धिमान होकरविवाहित हो—सुंदर। यदिबुद्धिमान होकरअविवाहित हो—वह भीसुंदर। मुद्दाविवाह नहीं,मुद्दाबुद्धि है। मुझेविवाह सेन पक्ष है,न विरोध। मुझेउस मन मेंरुचि हैजोसुरक्षा की ओरभागता है,जोकिसी दूसरे कोअपना बनाकरक़ैद करना चाहता है। उसी मन कोदेखनाज़रूरी है। विवाहकेवलसाथ रहने कानाम नहीं—वहकाम की दिशा बदल देता है,संतानों सेरिश्ता गढ़ देता है,जीवन केलगभग हर कोने कोछू लेता है।
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