व्यक्ति नहीं, प्रभाव देखो

व्यक्ति नहीं, प्रभाव देखो

सही संबंध
सही व्यक्ति खोजने से
नहीं बनता।

पहले
अपने को
किसी
सार्थक कार्य में
लगाओ—
और
जो तुम्हें
उस कार्य को
पूरा करने में
सहायक हो,
वही
संबंध के योग्य है।

उचित संगति
वरदान होती है।
यदि
किसी का साथ
मन को
प्रकाश दे,
जीवन को
ऊपर उठाए—
तो
स्वयं को
उससे
वंचित मत करो।

विवाह क्या है?
सबसे पहले—
साथ निभाने की
एक व्यवस्था।

दशकों तक
किसी के साथ
रहने का
निर्णय।

इसलिए
सबसे बड़ा प्रश्न
यह नहीं कि
वह कौन है,
बल्कि
यह है कि
उसका प्रभाव
तुम्हारे मन पर
कैसा है।

यदि
किसी की उपस्थिति
मन को
शांत करे,
बंधनों को
ढीला करे—
तो
निर्भय होकर
उसके साथ रहो।

पर
दुनिया का
सबसे उत्तम भोजन भी
किस काम का,
यदि
शरीर
उससे
एलर्जी रखता हो?

याद रखो—
महत्व
साथी का नहीं,
उस संग का है
जो
तुम्हें
किस दिशा में
ले जाता है।

हम
अक्सर
साथी को
देखते-देखते
यह भूल जाते हैं
कि
हम
खुद
कैसे हो रहे हैं।

किसी व्यक्ति की
महानता
उसकी
बुद्धि,
यश,
धन,
या देह से
नहीं मापी जाती।

वह
तब महान है
जब
उसके साथ रहकर
तुम
और
उत्कृष्ट बनते हो।

व्यक्ति नहीं—
प्रभाव देखो।

क्योंकि
सही संग
तुम्हें
वह बना देता है
जो
तुम
अकेले
शायद
कभी
न बन पाते।
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