फैशन के दौर पर इच्छा की गारंटी ना करें -मनीभाई नवरत्न
हिंदी कविता👗 फैशन के दौर पर इच्छा की गारंटी ना करें 👠 फैशन बदलते हैं —मौसम की तरह,रंगों की तरह,रुचियों की तरह। आज जो नया है,कल वही पुराना हो जाएगा।आज जो आकर्षक लगता है,कल वही अलमारी में पड़ेगा,भूल गया, बेकार। इच्छाएँ भी ऐसी ही होती हैं —फैशन की तरह अस्थायी,क्षणिक, चमकीली,पर भीतर से रिक्त। हर नया
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