कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

अचरज मा परगे

हिंदी कविता

अचरज मा परगे कोठी तो बढ़हर के* छलकत ले भरगे।बइमानी के पेंड़ धरे पुरखा हा तरगे॥अंतस हा रोथे संशो मा रात दिन।गरीब के आँसू हा टप-टप ले* ढरगे॥सुख के सपुना अउ आस ओखर मन के।बिपत के आगी मा सब्बो* हा  जरगे॥सुरता के रुखवा हा चढ़े अगास मा।वाह रे वा किस्मत! पाना अस झरगे*माछी नहीं गुड़ […]

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बच्चे होते मन के अच्छे

हिंदी कविता

बच्चे होते मन के अच्छे खेल कूद वो दिन भर करते,रखते हैं तन मन उत्साह।पेड़ लगा बच्चे खुश होते,चलते हैं मन मर्जी राह।।मम्मी पापा को समझाते,बन कर ज्ञानी खूब महान।बात बडों का सुनते हैं वे,रखते मोबाइल का ज्ञान।। रोज लगा जंगल बुक देखें,पाते ही कुछ दिन अवकाश।बेन टेन मल्टी राजू को,मोटू पतलू होते ख़ास।।गिल्ली डंडा

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अभाव-गुरु

हिंदी कविता

अभाव-गुरु “उस वस्तु का नहीं होना” मैं,जरूरत सभी जन को जिसकी।प्रेरक वरदान विधाता का,सीढ़ी मैं सहज सफलता की।।1अभिशाप नहीं मैं सुन मानव,तेरी हत सोंच गिराती है।बस सोंच फ़तह करना हिमगिरि,यह सोंच सदैव जिताती है।।2वरदान और अभिशाप मुझेतेरे ही कर्म बनाते हैं।असफल हताश,औ’ कर्मविमुखमिथ्या आरोप लगाते हैं।।3तीनों लोकों में सभी जगह,मैंने ही पंख पसारे हैं।सब जूझ

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सीमा पर है जो खड़ा

हिंदी कविता

सीमा पर है जो खड़ा                           सीमा पर है जो खड़ा ,                          अपना सीना तान ।उसके ही परित्याग से ,                         रक्षित  हिंदुस्तान ।।रक्षित    हिंदुस्तान ,                   याद कर सब कुरबानी ।करे शीश का दान ,                    हिंद का अद्भुत दानी ।।कह ननकी कवि तुच्छ ,                    कहें सब अर्जुन भीमा ।पराक्रमी शूर  शौर्य ,                नहीं जिसकी बल सीमा

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कर्म देवता

हिंदी कविता

इस कविता के प्रत्येक चरण में 16 मात्रा वाले छंद का प्रयोग किया गया है:- मानव जीवन ईश्वर का रहस्यमय वरदान है।आज के मानव का एकमात्र उद्देश्य अति धन-संग्रह है,जिसके लिए वे अपनों का भी खून बहाने से नहीं हिचकते।वे भूल गए हैं कि जीवन क्षणिक है।मृत्यु पश्चात बेईमानी से संचित उस धन से,रिस्ते-नातों से

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शपथ उठाती हूं मैं भारत की बेटी

हिंदी कविता

शपथ उठाती हूं मैं भारत की बेटी शपथ उठाती हूं मैं भारत की बेटीमैं कभी भी  सर नहीं झुकाऊंगीलाख कर लो तुम भ्रूण की हत्याफिर भी जन्म मै लेती ही जाऊंगी। कब तक तुम मुझको मारते रहोगेकभी तो तुम्हें मुझपे तरस आएगीफिर भी अगर नहीं सुधरोगे अगरसोचो बेटों की बारात कहां जाएगी। कर लो तुम

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कोठी तो बढ़हर के छलकत ले भरगे

हिंदी कविता

कोठी तो बढ़हर के छलकत ले भरगे कोठी तो बढ़हर के* छलकत ले भरगे।बइमानी के पेंड़ धरे पुरखा हा तरगे॥अंतस हा रोथे संशो मा रात दिन।गरीब के आँसू हा टप-टप ले* ढरगे॥सुख के सपुना अउ आस ओखर मन के।बिपत के आगी मा सब्बो* हा  जरगे॥सुरता के रुखवा हा चढ़े अगास मा।वाह रे वा किस्मत! पाना

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कहें सच अभी वो जमाना नहीं है

हिंदी कविता

कहें सच अभी वो जमाना नहीं है कहें सच अभी वो जमाना नहीं है।यहाँ सच किसी को पचाना नहीं है॥मिले जो अगर यूँ किसी को अँगाकर। खिला दो उसे तो पकाना नहीं है॥लगे लूटने सब निठल्ले यहाँ पर।उन्हें तो कमाना धमाना नहीं है॥मुसीबत अगर आ गई तो फँसोगे। यहाँ बच सको वो बहाना नहीं है॥पसीना बहाया यहाँ

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बाते सोलह आने सच है

हिंदी कविता

बाते सोलह आने सच है पानी के लिए कुँएँ बावली नल में होता है खूब जमावमहाराष्ट्र में लगा था धारा 144 देख कर भीड़ में टकराव पानी के स्रोतों के पास समूह नहीं हो सकते थे खड़ेजल संकट से जूझ रहे हैं धीरे धीरे राज्य छोटे बड़े आगे चल कर के पानी के लिए छिड़

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कविता मेरी ऐसी हो

हिंदी कविता

कविता मेरी ऐसी हो कविता मेरी  ऐसी होजिसमें हो कोई संदेश ।संतों की वाणी हो जिसमेंगीता का उपदेश ।गौतम हो गुरू नानक होहो उनकी गुरु वाणीगंगा जल की पवित्रता होमहानदी का पानी ।गंगा से सिंचित कविता कोमिले नया  परिवेश ।संतों की वाणी हो जिसमेंगीता का उपदेश ।लक्ष्मी बाई हो कविता मेंभगत सिंग  बलिदानी ।विस्मिल और

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जीवन की है परिभाषा

हिंदी कविता

जीवन की है परिभाषा अक्षर अक्षर भावों से  गुंजितकल्पना की मिठास है कविताकवि मन की मर्म अभिव्यंजनामृदु निर्झरित एहसास है कविता lसुख दुख से परिपूर्ण जीवन कीशब्द शक्ति की आशा है कवितारवि किरणों से भी सशक्त है येजीवन की है परिभाषा कविता lमन  हृदयभाव उद्गारों की  निधिकपोल कल्पित स्मित है कवितामरु को  भी  मधुमय  कर

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कविता क्या है?

हिंदी कविता

कविता क्या है? कम शब्दों में अधिक वर्णन कविता है ठेस लगी तो दुख का वर्णन कविता है भावनाओं का आकर्षक वर्णन कविता है शब्दों का तरंगित होना कविता है शब्दों का रोद्र हो जाना कविता है अनायास ही गुनगुनाना कविता है शब्दों का अनुशासित होना कविता है शब्दों का बहुआयामी होना कविता है शब्दों

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