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करना हो तो काम बहुत हैं
हमारी भाग्य विधाता मां
समय -देवता
तू ही मेरा प्रारब्ध है माँ”
माँ तेरी ममता का कोई मोल नहीँ
माँ पर कविता – अभिलाषा
दिल अपना तुझको दिया है
सुन मैंया मोरी राधा से ब्याह करादे
मौन बोलता है
धरती माता रो रो कर करती यही पुकार
हे धरती के भगवान
ढूँढूँ भला खुदा की मैं रहमत
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